यह सोचना गलत है कि सरकार के खिलाफ फैसला देने पर ही कोई न्यायाधीश स्वतंत्र होता है: निवर्तमान सीजेआई
दिलीप
- 23 Nov 2025, 09:40 PM
- Updated: 09:40 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 23 नवंबर (भाषा) निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई ने रविवार को इस आम धारणा को गलत बताकर खारिज कर दिया कि न्यायाधीश को तब तक आजाद नहीं माना जा सकता, जब तक वह सरकार के खिलाफ फैसला न सुनाए।
कार्यकाल के अंतिम दिन यहां अपने आधिकारिक आवास पर संवाददाताओं से बात करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा, “जब तक आप सरकार के खिलाफ फैसला नहीं करते, आप एक स्वतंत्र न्यायाधीश नहीं हैं... यह सही नहीं है। आप यह तय नहीं करते कि मुकदमा दायर करने वाली सरकार है या कोई आम नागरिक। आप अपने सामने मौजूद दस्तावेजों के हिसाब से फैसला करते हैं।”
उन्होंने कहा कि आज के समय में, किसी न्यायाधीश को 'स्वतंत्र' तभी कहा जाता है, जब फैसला सरकार के खिलाफ दिया गया हो।
उन्होंने कहा, “इसके अलावा, न्यायपालिका में अवसंरचना के विकास के लिए हमें सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। हमारे पास पैसे की शक्ति नहीं है। इसलिए, कभी-कभी टकराव हो सकता है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि लगातार टकराव की जरूरत है; इससे अनावश्यक समस्याएँ उत्पन्न होंगी।’’
केंद्र के सहयोग का जिक्र करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति गवई ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकार ने कॉलेजियम की ओर से सुझाए गए लगभग सभी नामों को मंजूरी दी।
उन्होंने कहा, “विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगभग 107 न्यायाधीश नियुक्त किए गए। मैंने बंबई उच्च न्यायालय को 14 और मध्य प्रदेश को 12 न्यायाधीश दिए।”
न्यायमूर्ति गवई ने यह भी कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालयों के 12 मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की और यह सुनिश्चित किया कि बंबई उच्च न्यायालय को 45-50 साल के युवा न्यायाधीश मिलें, “जो ज्यादा समय तक काम कर पाएं।”
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर दो दशक से अधिक समय तक उन पर किसी भी सरकार का दबाव नहीं रहा।
वायु प्रदूषण को लेकर अदालत के आदेशों के कम से कम असर पर उन्होंने कहा कि राज्य और उसके प्राधिकारियों को इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान ढूंढने होंगे।
उन्होंने पटाखों पर प्रतिबंध जैसे अदालती आदेशों को ठीक ढंग से लागू न करने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “लुटियंस दिल्ली में भी, जब प्रतिबंध लागू था, तब हमने पटाखे फोड़े जाने की आवाज सुनी।”
उन्होंने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या भी पर्याप्त नहीं थी।
उन्होंने कहा, “मैंने कुछ निर्देश जारी किए हैं कि एक तय समय में रिक्तियां भर दी जाएं।”
भाषा जोहेब दिलीप
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