आर्य समाज ने भारत की वैदिक विरासत और पहचान को संरक्षित रखा: प्रधानमंत्री मोदी
अमित पवनेश
- 31 Oct 2025, 06:40 PM
- Updated: 06:40 PM
नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की वैदिक विरासत के संरक्षण में समाज सुधारक दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज के योगदान की शुक्रवार को सराहना की और उससे पांडुलिपियों के अध्ययन एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्य समाज की स्थापना की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में संगठन की भूमिका की सराहना की और यह माना कि राजनीतिक कारणों से इसे उचित मान्यता नहीं मिल पायी।
मोदी ने समारोह में कहा, ‘‘आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष... यह अवसर समाज के किसी एक हिस्से या संप्रदाय से जुड़ा नहीं है। यह अवसर भारत की वैदिक विरासत और पहचान से जुड़ा है।"
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती और आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम में 39 देशों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
मोदी ने कहा, ‘‘यह अवसर भारत के उस विचार से जुड़ा है, जिसमें गंगा के प्रवाह की तरह आत्म-शुद्धि की शक्ति निहित है। यह उस महान परंपरा से जुड़ा है, जिसने सामाजिक सुधार को निरंतर आगे बढ़ाया है और जिसने स्वतंत्रता संग्राम के असंख्य सेनानियों को वैचारिक ऊर्जा दी है।’’
मोदी ने कहा कि लाला लाजपत राय, राम प्रसाद बिस्मिल और कई अन्य क्रांतिकारियों ने आर्य समाज से प्रेरणा ली और इसके लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्यवश, राजनीतिक कारणों से, स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज की भूमिका को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्य समाज एक ऐसा संगठन रहा है जो निडरता से भारतीयता की बात करता है, दृढ़ राष्ट्रवादियों का संगठन है और जिसने हमेशा भारत-विरोधी विचारधाराओं और सांस्कृतिक प्रदूषण के कुत्सित प्रयासों को चुनौती दी है।
मोदी ने आर्य समाज के सदस्यों से युवाओं को पांडुलिपियों का अध्ययन करने और मोटे अनाजों की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
भाषा अमित