कॉजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस नोटिस मिल रहे, दिल्ली में आंदोलन में शामिल न होने का दबाव बना रहे: दीपके
Daily world
- 06 Oct 2026, 02:27 PM
- Updated: 02:27 PM
छत्रपति संभाजीनगर, छह अक्टूबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कॉजपा के कार्यकर्ताओं को पुलिस के नोटिस दिए जा रहे हैं, उनसे उनके यात्रा खर्च को लेकर सवाल किए जा रहे हैं और 10 अक्टूबर को नयी दिल्ली में कॉजपा के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का दबाव बनाया जा रहा है।
महाराष्ट्र के संभाजीनगर शहर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दीपके ने आरोप लगाते हुए कहा, ''यह तानाशाही है।''
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर निशाना साधते हुए दीपके ने यह भी दावा किया कि 'एक देश, एक चुनाव' महज एक नारा है और मंशा ''एक देश, एक राजनीतिक दल'' की है।
कॉजपा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का प्रस्ताव रखा है।
दीपके ने दावा किया कि चंद्रपुर पुलिस ने कॉजपा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर उनसे 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं होने को कहा और यात्रा खर्च के लिए धन के स्रोत को लेकर सवाल किया।
उन्होंने आरोप लगाया, ''मैंने कई बार कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे अच्छी पुलिस है और दिल्ली पुलिस को उससे सीखना चाहिए। लेकिन यह दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने कॉजपा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर उन्हें जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल नहीं होने को कहा। उन्होंने जंतर-मंतर तक यात्रा के खर्च के स्रोत के बारे में भी पूछा।''
दीपके ने सवाल किया कि पुलिस कैसे पहले से अनुमान लगा सकती है कि प्रदर्शन हिंसक हो जाएगा।
उन्होंने सवाल किया, ''पुलिस ने यह भी कहा है कि यह आंदोलन 'हिंसक' होने वाला है। पुलिस को इतनी जल्दी कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होगा? क्या उन्होंने पहले से ही कोई योजना बनाई है?''
उन्होंने पुलिस के उस निर्देश पर भी सवाल उठाए जिसमें कॉजपा कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट नहीं करने को कहा गया था जिनसे कथित तौर पर हिंसा भड़क सकती है।
उन्होंने पूछा, ''हम (महात्मा) गांधी और बी आर आंबेडकर की बात करते हैं। क्या उन्हें यह हिंसक लगता है?''
दीपके ने आरोप लगाया, ''महाराष्ट्र पुलिस दिल्ली पुलिस जैसा बर्ताव क्यों कर रही है? अगर कोई व्यक्ति महाराष्ट्र के चंद्रपुर से दिल्ली जा रहा है तो उन्हें इससे क्या लेना-देना? चंद्रपुर पुलिस का इसमें क्या काम है? क्या कोई 1,000 या 1,500 रुपये का टिकट नहीं खरीद सकता? यह कैसा सवाल है? यह स्पष्ट रूप से तानाशाही है।''
मुंबई के शिवाजी पार्क में दो अक्टूबर को एक बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद दीपके ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
विपक्षी दलों ने मतदता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद की खबरों को लेकर अभियान शुरू किया है। निर्वाचन आयोग ने उसके सदस्यों के बीच मतभेद की बातों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।