उत्तराखंड सरकार ने 142 एकड़ जमीन रामदेव की कंपनी को एक करोड़ रुपये सलाना में दिया:कांग्रेस
दीप्ति राजकुमार
- 13 Sep 2025, 01:20 AM
- Updated: 01:20 AM
देहरादून, 12 सितंबर (भाषा) वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर मसूरी में ‘जार्ज एवरेस्ट एस्टेट’ की 30 हजार करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली जमीन केवल एक करोड़ रुपये सालाना के मामूली किराए पर बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद से संबंधित कंपनी को देने का आरोप लगाया ।
उन्होंने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराने की मांग की ।
सोशल मीडिया पर एक बयान में आर्य ने यह भी दावा किया कि जिस 142 एकड़ भूमि को 15 साल के लिए एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की कंपनी 'राजस एयरो स्पोर्टस एंड एडवैंचर प्राईवेट लिमिटेड’ को दिया गया है, उस भूमि को सरकार ने पहले एशियाई विकास बैंक से 23 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर विकसित किया था ।
उन्होंने कहा, ‘‘अब यह तो सरकार और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के काबिल अधिकारी ही बता सकते हैं कि कर्ज के 23 करोड़ रुपये से जमीन का सजा-धजा कर और उसकी सारी कमियां दूर कर 15 साल के लिए राज्य की अरबों की जमीन देकर किराये के रुप में 15 करोड़ कमाने का ये विकास का कौन सा मॉडल है।'
आर्य ने बताया कि उत्तराखंड पर्यटन बोर्ड ने मसूरी में साहसिक पर्यटन के लिए एक निविदा निकाली जिसमें निविदा हासिल करने वाली कंपनी को 142 एकड़ में फैली जगह पर म्यूजियम, ऑब्जरवेटरी, कैफेटेरिया, स्पोर्ट्स एरिया, पार्किंग आदि सबके प्रबंधन का जिम्मा मिलना था । यह निविदा 2022—23 में निकाली गयी थी ।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘राजस एयरो स्पोर्टस’ ने महज एक करोड़ रुपए सालाना के किराए पर यह ठेका हासिल कर दिया जबकि रोचक बात यह रही कि बोली में दूसरे और तीसरे स्थान पर जिन कंपनियों के नाम आए, उनकी मलकीयत भी बालकृष्ण के पास है।
आर्य ने आरोप लगाया कि तीनों कंपनियों के कार्यालय एक ही पते पर हैं और तीन में से केवल राजस एयरो स्पोर्टस ही सभी शर्तें पूरी करती थीं । उन्होंने कहा, 'टेंडर डालने वाली बाकी दो नई कंपनियां कोई शर्तें पूरा नहीं करती थी लेकिन टेंडर के दिन शर्तों में परिवर्तन कर दो अयोग्य कंपनियों को टेंडर में भाग लेने की अनुमति दी गयी जो सरकार के वित्त अनुभाग- 7 के 14 जुलाई 2017 की उत्तराखंड अधिप्राप्ति (प्रक्योरमैंट) नियमावली का उल्लंघन था ।'
भाषा दीप्ति