कॉजपा प्रदर्शन का 15वां दिन: और राजनीतिक समर्थन मिला, आइसा विद्यार्थी अस्पताल में भर्ती
राजकुमार
- 04 Jul 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का यहां जंतर मंतर पर प्रदर्शन शनिवार को 15 वें दिन भी जारी रहा तथा उसके पक्ष में आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास भी सामने आ गये जबकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सातवें दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे रहे।
'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) ने कहा कि भूख हड़ताल कर रही उसकी एक छात्र नेता की हालत गंभीर होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आइसा ने बताया कि सात दिन के उपवास के बाद रक्त शर्करा स्तर 46 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक गिर जाने के कारण जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की संयुक्त सचिव दानिश अली को शनिवार शाम राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
संगठन ने बताया कि उन्हें नसों के ज़रिए 'फ्लूड' देने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि आइसा के पांच अन्य कार्यकर्ताओं -- नेहा, मनीष, ऋषिकेश, दीपक और आमीन -- ने वांगचुक और दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी।
आप नेता सिंह ने सभा में अपने संबोधन में भाजपा सरकार पर परीक्षाओं से जुड़े बार-बार हुए विवादों के बावजूद विद्यार्थियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया । उन्होंने सवाल किया कि भाजपा नेता विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर क्यों नहीं गए।
आप सांसद ने कहा, ''सभी राजनीतिक पार्टियां यहां देश के युवाओं की एक जायज मांग के प्रति एकजुटता जाहिर कर रही हैं। भाजपा नेताओं को यहां आकर विद्यार्थियों का समर्थन करने से कौन रोक रहा है?''
उन्होंने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि उन्हें इसका समाधान निकालना चाहिए, वरना हम संसद को चलने नहीं देंगे।''
प्रदर्शनकारियों के समर्थन में केरल से यहां पहुंचे माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने इस आंदोलन को युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए देशव्यापी संघर्ष बताया।
परीक्षा में गड़बड़ी के बार-बार लग रहे आरोपों का ज़िक्र करते हुए ब्रिटास ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आयोजित लगभग हर बड़ी परीक्षा पर सवाल उठे हैं। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक शिक्षा के लिए लड़ाई का नेतृत्व करने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल संसद के अंदर और बाहर यह मुद्दा उठाते रहेंगे।
वांगचुक ने कहा, ''अगर हमें ज़बरदस्ती हटाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए एक धब्बा होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हटाया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी सिर्फ़ शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
इससे पहले कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 'एक्स' पर कहा था कि हर गुजरते दिन के साथ वांगचुक की हालत बिगड़ती जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि (शिक्षा मंत्री धमेंद्र) प्रधान को पद से अब तक क्यों नहीं हटाया गया।
दीपके ने कहा था, ''सोनम वांगचुक का वजन पांच किलोग्राम घट गया है और हर गुजरते दिन के साथ उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए प्रधानमंत्री और कितना समय लेंगे?''
दीपके ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि यदि सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कुछ भी गलत हुआ तो सरकार जिम्मेदार होगी।
कॉजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए एक खुला पत्र भी जारी किया, जिसमें उनसे आंदोलन पर अपनी 'गहरी चुप्पी' तोड़ने और कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और विद्यार्थियों की आत्महत्याओं के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराने की अपील की गयी है।
पत्र में कहा गया कि वांगचुक की भूख हड़ताल का उद्देश्य सरकार पर 'नैतिक दबाव' डालना है। उसमें सवाल उठाया गया कि 15 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं हुई।
इसमें उन आरोपों को भी दोहराया गया कि विरोध स्थल पर लाइब्रेरी बनाने की कोशिश के दौरान दिल्ली पुलिस ने विद्यार्थियों के साथ मारपीट की और किताबें फेंक दीं, जिनमें छत्रपति शिवाजी महाराज, बी.आर. आंबेडकर और भगत सिंह पर लिखी किताबें भी शामिल थीं।
वांगचुक ने शुक्रवार देर रात 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा कर क्षेत्र की मांगों को लेकर केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया तथा सरकार से अब शिक्षा में जवाबदेही पर ध्यान देने का आग्रह किया।
इससे पहले, लेह शीर्ष निकाय (एलएबी) और कारगिल लोकतांत्रिक गठबंधन (केडीए) के नेताओं ने शुक्रवार को कहा था कि उन्होंने गृह मंत्रालय के साथ पिछली बैठक के विवरण पर मतभेदों को सुलझा लिया है।
कॉजपा के आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का भी समर्थन मिला, जिसने घोषणा की कि उसका एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को जंतर-मंतर का दौरा करेगा।
दिपके को लिखे पत्र में, किसान संगठन ने कहा कि वह इस विरोध प्रदर्शन के साथ पूरी तरह से एकजुट है।
कॉजपा का यह आंदोलन नीट सहित परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में 20 जून को शुरू हुआ था।
इस आंदोलन को एम ए बेबी, बृंदा करात, डी राजा, एनी राजा, दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, अंजलि भारद्वाज, निखिल डे, सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा समेत राजनीतिक नेताओं और नागरिक संस्था के सदस्यों के एक व्यापक वर्ग से समर्थन मिला है।
भाषा
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