सरकार ने गन्ने का लाभकारी मूल्य 10 रुपये बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल किया
रमण
- 05 May 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) सरकार ने मंगलवार को अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य 10 रुपये बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) पर यह फैसला किया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया, ''10.25 प्रतिशत की मूल प्राप्ति (रिकवरी) दर के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल होगा।''
मंजूर किया गया एफआरपी, मौजूदा 2025-26 सत्र की दर (355 रुपये प्रति क्विंटल) से 2.81 प्रतिशत अधिक है।
हर 10.25 प्रतिशत से ऊपर रिकवरी में 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर, एफआरपी में 3.56 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होती है। इससे ज्यादा रिकवरी को प्रोत्साहन मिलता है।
सरकार ने उन किसानों के हित में कदम उठाया है जिनके गन्ने से मिलों को 9.5 प्रतिशत से कम गन्ना रस की प्राप्ति (रिकवरी) होती है। उनके लिए यह फैसला किया गया है कि ऐसे मामलों में एफआरपी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। ऐसी मिलों को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को वर्ष 2026-27 के सत्र में 338.3 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे।
सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 182 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, वहीं निर्धारित एफआरपी उत्पादन लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है।
मंत्री ने कहा, ''किसानों को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद है।''
उन्होंने कहा कि इस फैसले से लगभग एक करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होने, गन्ना खेती में लगे खेतिहर मज़दूरों को मदद मिलने और चीनी मिलों का लगातार संचालन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
एफआरपी को कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर तथा राज्य सरकारों एवं अन्य अंशधारकों के साथ परामर्श के बाद निर्धारित किया गया है।
चीनी मिलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसानों से गन्ना एफआरपी या उससे अधिक कीमत पर खरीदें। चीनी सत्र अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।
मंत्री ने कहा कि पिछले दस साल में गन्ने का एफआरपी हर साल बढ़ा है।
इस कदम से लगभग एक करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होगा और गन्ने की खेती में लगे खेतिहर मजदूरों को मदद मिलेगी। साथ ही चीनी मिलों का लगातार चलना और घरेलू चीनी की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि इससे चीनी मिलों और उससे जुड़ी गतिविधियों में काम करने वाले पांच लाख मजदूरों को बेहतर रोजी-रोटी मिलेगी। साथ ही अतिरिक्त गन्ने से एथनॉल का उत्पादन भी संभव हो पाएगा।
भाषा राजेश राजेश रमण
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0505 2029 दिल्ली