क्षेत्रीय योजना-2041: एनसीआर की सीमा में कोई बदलाव नहीं, बनेंगे चार 'नमो' शहर; क्षेत्र तीन जोन में बंटेगा
प्रशांत
- 17 Jun 2026, 01:01 AM
- Updated: 01:01 AM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से चार नए 'नमो' ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे। इनमें हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एक-एक शहर स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) की मंगलवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि एनसीआर की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, क्षेत्रीय योजना-2041 को अंतिम रूप देने के लिए एक उपसमिति गठित करने पर भी सहमति बनी।
अधिकारियों के अनुसार, एनसीआर को तीन जोन में बांटा जाएगा। इसके तहत प्रदूषण संबंधी और अन्य प्रतिबंध केवल दिल्ली तथा उससे सटे केंद्रीय एनसीआर क्षेत्रों में लागू होंगे, जबकि एनसीआर में शामिल लेकिन राजधानी से अपेक्षाकृत दूर स्थित जिलों को इन प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी।
एनसीआरपीबी ने हरियाणा के उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जिसमें करनाल, जींद, पानीपत, महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे पांच बाहरी जिलों को एनसीआर से बाहर करने की मांग की गई थी।
इसके बजाय, सेंट्रल एनसीआर (सीएनसीआर) का विकास दिल्ली के बाहर किया जाएगा, जो ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बने रिंग कॉरिडोर की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर तक विस्तारित होगा।
प्रस्तावित क्षेत्रीय योजना-2041 के अनुसार, सीएनसीआर को एनसीआर का 'गोल्डन रिंग ऑफ अपॉर्च्युनिटी' (अवसरों का स्वर्णिम क्षेत्र) बनाया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत यदि भविष्य में प्रदूषण संबंधी प्रतिबंध लागू करने की आवश्यकता पड़ती है, तो संबंधित प्राधिकरणों से उन्हें केवल सेंट्रल एनसीआर क्षेत्र में लागू करने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि एनसीआर के दूरदराज के जिलों को विकास संबंधी बाधाओं का सामना न करना पड़े।
हालांकि, बहुप्रतीक्षित क्षेत्रीय योजना-2041 को मंगलवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई एनसीआरपीबी की बैठक में मंजूरी नहीं मिल सकी क्योंकि भाग लेने वाले राज्यों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्रियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
लाल ने कहा कि बैठक में राज्यों ने क्षेत्रीय योजना 2041 के हर पहलू पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि दो महीने बाद एक और बैठक होगी जिसमें इसे अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा।
"नमो" शहरों के नाम से विकसित किए जाने वाले चार नए ग्रीनफील्ड शहरों की परिकल्पना आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी केंद्रों के रूप में की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बढ़ती आबादी को समायोजित करने के लिए इन चार 'नमो नोड्स' का विकास रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के साथ किया जाएगा।
'सिटी नोड' एक ऐसा नियोजित शहरी केंद्र होता है, जो परिवहन नेटवर्क के माध्यम से अन्य शहरों से जुड़ा होता है और जहां आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में एनसीआर की आबादी लगभग 7.5 करोड़ है, जो अगले 15 वर्षों में बढ़कर 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। आने वाले दशकों में यह क्षेत्र तेजी से शहरीकृत होगा। वर्ष 2031 तक यहां की लगभग 57 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी, जबकि 2041 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 67 प्रतिशत हो जाने की संभावना है।
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में भीड़ कम करने और तेजी से बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के दोहरे मकसद को ध्यान में रखते हुए उत्पादक आर्थिक गतिविधियों पर आधारित चार नए ग्रीनफील्ड उपनगर विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि एनसीआरपीबी ने छह पड़ोसी राज्यों में फैले नौ काउंटर मैग्नेट एरिया (सीएमए) की भी पहचान की है। इनमें हिसार, अंबाला, कोटा, जयपुर, पटियाला-राजपुरा, कानपुर-लखनऊ, बरेली, ग्वालियर और देहरादून शामिल हैं।
सीएमए ऐसे शहरी केंद्र होते हैं जिन्हें महानगरीय क्षेत्रों पर आबादी के पलायन और आर्थिक दबाव को कम करने के लिए विकसित किया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में यह इलाका भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में आठ प्रतिशत का योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।
यह देश का एकमात्र और दुनिया के उन चुनिंदा इलाकों में से एक है, जहां मेट्रो रेल, रैपिड रेल और कई एक्सप्रेसवे मौजूद हैं। ये साधन बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्रीय योजना का मकसद एक नए और जीवंत भारत के लिए भविष्य के अनुकूल एनसीआर का विकास करना है। इसके लिए नागरिकों पर केंद्रित ऐसा बुनियादी ढांचों को तैयार किया जाएगा जो सामंजस्यपूर्ण, पर्यावरण के अनुकूल, स्मार्ट और डिजिटल तकनीक पर आधारित हों। साथ ही, इसका लक्ष्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एक आर्थिक रूप से समृद्ध क्षेत्र का निर्माण करना है।
भाषा
सुरभि प्रशांत
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