पंचायती राज संस्थानों के कैग ऑडिट से कामकाज में होगा सुधार: नागेश्वरन
अजय
- 08 Jun 2026, 07:30 PM
- Updated: 07:30 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले कोष का देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के लेखापरीक्षा करने से इनके कामकाज में सुधार होगा और गांवों में जीवन यापन में सुगमता आएगी।
नागेश्वरन ने यहां कहा, ''कैग लेखापरीक्षा से हमें प्रत्येक राज्य में होने वाले कार्यों के बारे वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। इससे एक ऐसा साक्ष्य आधारित आधार बनेगा जो वर्तमान में मौजूद नहीं है और संवैधानिक उद्देश्य और प्रशासनिक वास्तविकता के बीच के अंतर के लिए जवाबदेही तय होगी।''
उन्होंने पंचायती राज मंत्रालय से राज्य वित्त आयोगों के लिए आंकड़ों से जुड़ी समिति की इस सिफारिश को सक्रियता से लागू करने का आग्रह किया।
नागेश्वरन ने यह भी कहा कि राज्यों की राजकोषीय जवाबदेही के लिए एकसमान लेखा मदों को लागू करने की आवश्यकता है। इससे स्थानीय निकायों को किए जाने वाले सभी केंद्रीय हस्तांतरण का एक समान प्रबंधन सुनिश्चित होने के साथ तुलना संभव हो सके।
राज्य वित्त आयोगों के लिए आंकड़ों पर समिति की रिपोर्ट जारी किये जाने के अवसर पर नागेश्वरन ने कहा, ''वास्तव में जो अधिकार हस्तांतरित किए गए हैं और जो वादे किए गए थे, उनका व्यवस्थित और स्वतंत्र मूल्यांकन किए बिना हम अंधेरे में तीर चला रहे हैं।''
केंद्र सरकार वित्त आयोगों के माध्यम से और स्थानीय निकाय अनुदान के जरिये राज्य सरकारों को धनराशि हस्तांतरित करती है।
पंचायती राज मंत्रालय की इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि कैग 73वें संविधान संशोधन का प्रदर्शन ऑडिट करे, जिसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया था।
इस संशोधन में हर पांच साल में राज्य वित्त आयोगों के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
इस संशोधन में 29 कार्यों की सूची दी गई थी जिन्हें पंचायतों को हस्तांतरित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ''हमें स्वयं से यह प्रश्न अवश्य पूछना चाहिए कि संवैधानिक वादे का कितना हिस्सा वास्तव में पूरा हुआ है।''
नागेश्वरन के अनुसार, राज्यों की वित्तीय स्थिति का निर्धारण करने में वित्त आयोगों के सामने एक प्रमुख चुनौती विस्तृत राजकोषीय जानकारी का अभाव है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि स्थानीय सरकार स्तर के आंकड़ों को बनाए रखने और उसे नियमित रूप से अद्यतन करने के लिए राज्य सरकारों के भीतर स्थायी राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ का गठन किया जा सकता है।
इसमें कहा गया, ''आदर्श रूप से, इस प्रकोष्ठ को वित्त विभाग या योजना विभाग के अंतर्गत स्थापित किया जाना चाहिए।''
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार राज्यों को हस्तांतरित की जाने वाली राशि का निर्धारण करती है। लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर संरचना की कमी के कारण कोष का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता है।
इसमें कहा गया, ''इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकारें और केंद्र सरकार दोनों ही इन आंकड़ों को एकत्रित और व्यवस्थित करने के लिए तत्काल और सक्रिय कदम उठाएं। इनके प्रारूप को मानकीकृत करें और यह सुनिश्चित करें कि ये सभी राज्य वित्त आयोगों के लिए उपलब्ध हों।''
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे राज्य वित्त आयोगों को हस्तांतरण प्रक्रिया में सोच-विचार कर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
भाषा रमण अजय
अजय
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