देश के 23 प्रमुख मझोले शहरों में औसत आवास कीमतें बढ़ीं, पांच शहरों में दरें घटीं: प्रॉपइक्विटी
निहारिका रमण
- 05 Dec 2024, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
नयी दिल्ली, पांच दिसंबर (भाषा) इस वर्ष जनवरी-सितंबर के दौरान 23 मझोले शहरों में शुरू की गई आवासीय परियोजनाओं की कीमत में 65 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई, जबकि पांच शहरों में दरों में गिरावट आई है।
ऑनलाइन रियल एस्टेट आंकड़ों तथा विश्लेषण से जुड़े मंच प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी-सितंबर के दौरान पेश की गईं आवासीय परियोजनाओं में जयपुर में नई परियोजनाओं की औसत कीमतों में सबसे अधिक 65 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और यह 6,979 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई। पिछले साल जयपुर में औसत दरें 4,240 रुपये प्रति वर्ग फुट थीं।
प्रॉपइक्विटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं संस्थापक समीर जसूजा ने कहा, ‘‘ मझोले शहरों में कंपनियों, कॉरपोरेट, वित्तीय संस्थानों तथा निवेशक समुदाय की ओर से रुचि देखी गई है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन शहरों में जमीन सस्ते में उपलब्ध होने, संपर्क सुविधाओं के बड़े पैमाने पर विकास और मजबूत मांग से प्रीमियम तथा लग्जरी आवास की आपूर्ति में वृद्धि हुई है। जयपुर, गुंटुर, गांधी नगर और भुवनेश्वर जैसे शहरों में पिछले एक साल के दौरान कीमतों में 15 से 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।’’
आंकड़ों के अनुसार, आगरा में कीमतों में 59 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके बाद चंडीगढ़ में 34 प्रतिशत, भिवाड़ी में 25 प्रतिशत, इंदौर में 20 प्रतिशत, देहरादून में 14 प्रतिशत, लुधियाना में 11 प्रतिशत और लखनऊ में एक प्रतिशत की वृद्धि हुई।
दक्षिण भारत की बात करें तो गुंटूर में सबसे अधिक 51 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके बाद मैंगलोर में 41 प्रतिशत, विशाखापत्तनम में 29 प्रतिशत, विजयवाड़ा में 21 प्रतिशत, कोयंबटूर में 11 प्रतिशत, गोवा में छह प्रतिशत और कोच्चि में दो प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पश्चिम भारत में गांधीनगर में आवासीय कीमतें 19 प्रतिशत बढ़ीं। इसके बाद सूरत में 14 प्रतिशत, नागपुर में 12 प्रतिशत, वडोदरा में 10 प्रतिशत, नासिक में चार प्रतिशत और अहमदाबाद में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पूर्वी भारत के आंकड़ों के अनुसार, भुवनेश्वर में कीमतें 15 प्रतिशत और रायपुर में 14 प्रतिशत बढ़ीं।
दूसरी तरफ, भोपाल में मकानों के औसत दाम में पांच प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसके साथ मोहाली तथा सोनीपत में क्रमशः आठ प्रतिशत और 26 प्रतिशत की गिरावट आई। जबकि त्रिवेंद्रम में चार प्रतिशत और मैसूर में 14 प्रतिशत की गिरावट आई।
भाषा निहारिका