दिल्ली उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार अफगान नागरिक को निर्वासित करने का आदेश दिया
सिम्मी रंजन
- 11 Oct 2024, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैध वीजा के बिना भारत में रह रहे उस अफगान नागरिक को उसके देश भेजने का आदेश दिया है जिसे शादी का झूठा वादा कर एक अमेरिकी नागरिक का आर्थिक और यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने दोनों पक्षों के बीच समझौता होने तथा सुनवाई समाप्त होने में देरी के आधार पर मामले में प्राथमिकी रद्द कर दी तथा जेल प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आरोपी को निर्वासित करने के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को सौंप दें।
ऐसा बताया जा रहा है कि 2016 और 2017 के बीच आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच मित्रता हुई और आरोपी ने कथित तौर पर अपनी फर्जी पहचान बताई तथा विभिन्न मौकों पर शिकायतकर्ता से लगभग 90,000 अमेरिकी डॉलर ले लिए। शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता मनोज तनेजा ने किया।
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी शादीशुदा है और पहले भी इसी तरह महिलाओं को धोखा दे चुका था।
न्यायमूर्ति महाजन ने नौ अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता एक शिक्षित महिला है और उसने प्राथमिकी रद्द करने की स्वेच्छा से सहमति दी है तथा आरोपी सात साल से अधिक समय से हिरासत में था। अदालत ने रेखांकित किया कि मुकदमा ‘‘समाप्त होता नजर नहीं आ रहा।’’
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई का अधिकार एक विदेशी के लिए भी उतना ही लागू होता है, जितना कि देश के नागरिक के लिए।
शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इस मामले को निपटाकर अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती है।
न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, ‘‘इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि शिकायतकर्ता अभियोजन पक्ष के मामले में सहयोग नहीं कर रही और यदि आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दे भी दी जाती है तो दोषसिद्धि की संभावना बहुत कम है... अदालत का मानना है कि मामले को देखते हुए और शिकायतकर्ता को राहत देने के लिए आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर इस अदालत की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करना उचित है।’’
इस मामले में भारतीय दंड संहिता, विदेशी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत बलात्कार, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के आरोपों में 2017 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
एफआरआरओ ने पाया कि आरोपी जुलाई 2013 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। उसके वीजा की अवधि उसी साल दिसंबर में समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद वह वापस नहीं गया।
भाषा सिम्मी