संजीव पांडे ने इजराइल-फलस्तीन युद्ध पर अमेरिकी रुख के विरोध में पीएचडी की डिग्री लौटाई
रवि कांत मनीषा
- 26 Mar 2024, 05:30 PM
- Updated: 05:30 PM
नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे ने इजराइल-फलस्तीन संघर्ष को लेकर अमेरिका के रुख के विरोध में अपनी पीएचडी की डिग्री कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी), बर्कले को आधिकारिक तौर पर लौटा दी है।
इससे पहले जनवरी में, संजीव पांडे ने गाजा में इजराइली हमले के सिलसिले में अमेरिका की 'भूमिका' के विरोध में प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार लौटाने के अपने फैसले की घोषणा की थी। उन्हें वर्ष 2002 में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया था।
सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मुद्दे पर सिरैक्यूज विश्वविद्यालय को अपनी एमएससी की दोहरी डिग्री भी लौटा दी है।
पांडे ने इन विश्वविद्यालयों को लिखे दो पत्रों में कहा कि इजराइल-फलस्तीन के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका की भूमिका निंदनीय है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा, ‘‘मेरा मानना है कि अमेरिका युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था और फलस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिलाकर इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ सकता था। लेकिन, इसके बजाय उसने फलस्तीनियों के खिलाफ इजराइल की आक्रामकता का आंख बंद करके सैन्य सहायता के जरिए समर्थन करना जारी रखा है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों सहित हजारों निर्दोष लोग मारे गए। ’’
उन्होंने कहा कि यह विश्वास करना बेहद मुश्किल है कि अमेरिका लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए खड़ा है।
पांडे ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के सभी रिकॉर्ड से अपना नाम हटाने का अनुरोध किया और सिरैक्यूज विश्वविद्यालय से भी ऐसा ही अनुरोध किया, जहां से उन्होंने अपनी दोहरी एमएससी डिग्री हासिल की। खबरों के मुताबिक, इजराइल के हमले में गाजा में अब तक 32 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान के दौरान गाजा में तत्काल संघर्षविराम के प्रस्ताव को पारित किया।
इजराइल और हमास के बीच संघर्ष के लगभग पांच महीने से अधिक वक्त बीतने के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया है।
पंद्रह राष्ट्रों वाली सुरक्षा परिषद ने 10 गैर-स्थायी निर्वाचित सदस्यों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को अपनाया। 14 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि अमेरिका मतदान में शामिल नहीं हुआ।
भाषा रवि कांत