हरियाणा : वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा के लिए अब भी बाकी है ‘संघर्ष’
शफीक अविनाश
- 08 Oct 2024, 08:14 PM
- Updated: 08:14 PM
चंडीगढ़, आठ अक्टूबर (भाषा) चार बार सांसद, छह बार के विधायक और कांग्रेस की तरफ से हरियाणा के मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जाने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मंगलवार को उस समय झटका लगा, जब जीत के उनके अनुमान उलट साबित हुए।
हरियाणा कांग्रेस में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए पार्टी के भीतर की ताकतों के साथ ही विपक्ष से मुकाबला करने वाले इस साहसी नेता की उम्र पिछले महीने 77 साल हो गई। लेकिन, ऐसा लगता है कि उनमें अब भी काफी संघर्ष बाकी है।
विधानसभा चुनाव के परिणामों से स्पष्ट है कि भाजपा हुड्डा के गृह राज्य में अब तक की सबसे बड़ी संख्या के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में लौट रही है और कांग्रेस 90 सदस्यीय विधानसभा में 37 सीटों (जीत या बढ़त) तक ही पहुंच सकी।
वर्ष 2005 में कांग्रेस द्वारा पार्टी के वरिष्ठ नेता भजनलाल को किनारे कर मुख्यमंत्री चुने गए हुड्डा का व्यक्तित्व कभी हार नहीं मानने वाला है।
वर्ष 2005 से 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हुड्डा ने आज सुबह रोहतक में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कांग्रेस को बहुमत मिलेगा। हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाएगी।’’
ऐसे चुनाव में, जहां उनकी पार्टी के कई सहयोगी हार गए, हुड्डा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र गढ़ी-सांपला किलोई में 71,465 मतों के भारी अंतर से दोबारा जीत हासिल की।
हुड्डा दो बार हरियाणा का मुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। वह रोहतक से चार बार सांसद भी रह चुके हैं। हुड्डा ने 1990 के दशक में इस संसदीय सीट से पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल को हराया था।
युवा कांग्रेस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले हुड्डा का जन्म 15 सितंबर, 1947 को रोहतक जिले के सांघी गांव में हुआ था। हुड्डा ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ और दिल्ली विश्वविद्यालय दोनों से पढ़ाई की। वह विधि स्नातक हैं। 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रणनीति एवं कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए उनकी अध्यक्षता में कृषि उत्पादन संबंधी कार्य समूह का गठन किया था।
हुड्डा के पिता दिवंगत चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। भूपेंद्र हुड्डा ने 1976 में आशा दहिया से शादी की और उनके दो बच्चे दीपेंद्र और अंजलि हैं।
भाषा शफीक