कोचिंग सेंटर में मौत मामले में आरोपपत्र दाखिल करने से रोकने की याचिका खारिज
आशीष धीरज
- 24 Sep 2024, 07:23 PM
- Updated: 07:23 PM
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओल्ड राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की डूबने से हुई मौत के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को आरोपपत्र दाखिल करने से रोकने के अनुरोध वाली याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत अदालत जांच एजेंसी को आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दे सके या आरोप पत्र दाखिल करने पर रोक लगा सके। अदालत ने जुलाई में बेसमेंट की घटना में जान गंवाने वाले छात्र के पिता की याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि याचिकाकर्ता के वकील द्वारा किया जा रहा अनुरोध कानून के दायरे से परे है। सीबीआई जांच करने की प्रक्रिया में है। ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत अदालत आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दे सकती है या आरोप पत्र दाखिल करने पर रोक लगा सकती है।’’
याचिकाकर्ता जे. डेल्विन सुरेश (छात्र नवीन डेल्विन के पिता) के वकील ने दलील दी कि चूंकि मामले के जांच अधिकारी इस अदालत और पीठ के आदेशों के अनुसार जांच नहीं कर रहे हैं, इसलिए सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने से रोका जा सकता है।
उच्च न्यायालय ने सुरेश की मुख्य याचिका पर सीबीआई को भी नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने मामले के जांच अधिकारी को बदलने की उनकी याचिका को खारिज करने वाले निचली अदालत के 20 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है। अदालत ने सीबीआई से याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को तय की।
याचिकाकर्ता ने महानिरीक्षक पद या इससे वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी से उचित जांच कराने, निचली अदालत द्वारा जांच की निगरानी करने तथा दिल्ली नगर निगम, दिल्ली अग्निशमन सेवा और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से पूछताछ करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया है।
मध्य दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में 27 जुलाई को भारी बारिश के बाद राउज आईएएस स्टडी सर्किल की इमारत के बेसमेंट में पानी भरने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन छात्रों-उत्तर प्रदेश की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल के नवीन डेल्विन (24) की मौत हो गई।
उच्च न्यायालय ने घटना की जांच दो अगस्त को दिल्ली पुलिस से सीबीआई को सौंप दी थी।
भाषा आशीष