न्यायालय ने महिला डॉक्टरों के लिए पश्चिम बंगाल की ‘रात्रि पाली ड्यूटी’ नीति पर आपत्ति जताई
आशीष माधव
- 17 Sep 2024, 09:59 PM
- Updated: 09:59 PM
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के ‘रात्रि साथी’ कार्यक्रम पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया है कि महिलाओं के काम के घंटे एक बार में 12 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए और रात की ड्यूटी से बचने का निर्देश दिया गया है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इस बात पर हैरत व्यक्त किया कि राज्य सरकार ने ऐसी अधिसूचना जारी की है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर पुरुष 12 घंटे से ज्यादा की पाली में काम कर रहे हैं, तो महिला डॉक्टर भी ऐसा करने की हकदार हैं। पीठ ने कहा, ‘‘आप कैसे कह सकते हैं कि महिलाएं रात की पाली में काम नहीं करेंगी? अगर आप उन्हें रात में काम करने से रोकेंगे तो महिलाओं को आपत्ति होगी।’’
पीठ ने कहा कि महिलाएं रियायतें नहीं चाहतीं, बल्कि उन्हें समान अवसर चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘हमें महिला डॉक्टर को रात में काम करने से क्यों रोकना चाहिए।’’ अदालत ने आदेश दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार को तुरंत अधिसूचना को सही करना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘आपका कर्तव्य सुरक्षा प्रदान करना है, आप यह नहीं कह सकते कि महिलाएं (डॉक्टर) रात में काम नहीं कर सकतीं। पायलट, सैनिक सभी रात में काम करते हैं। इससे उनके (डॉक्टरों) करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सभी डॉक्टरों के लिए ड्यूटी के घंटे तर्कसंगत होने चाहिए।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि रात में काम करने वाली महिला डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार का कर्तव्य है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर राज्य सरकार महिला डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार नहीं है तो केंद्र उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह केवल एक अस्थायी सुरक्षा उपाय है तथा राज्य सरकार इसे ठीक करने के लिए अधिसूचना जारी करेगी।
सरकारी और निजी क्षेत्रों में रात्रि पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक उपाय जारी किए थे और ‘रात्रि साथी-हेल्पर्स ऑफ द नाइट’ नाम से एक प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया था।
भाषा आशीष