पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों के लिए चलाया जा रहा है नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम
राजकुमार मनीषा
- 02 Sep 2024, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) पंचायत राज मंत्रालय जमीनी स्तर पर नेतृत्व को विकसित करने और उसे मजबूत करने के उद्देश्य से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के लिए परिवर्तनकारी प्रबंधन विकास कार्यक्रम चला रहा है।
मंत्रालय ने कहा कि आठ राज्यों- बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल - के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के लिए पांच दिवसीय आवासीय कार्यक्रम बोधगया के भारतीय प्रबंधन संस्थान में चलाया जा रहा है।
इस बीच, अरूणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर (केंद्रशासित प्रदेश), मध्यप्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पंजाब पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अमृतसर के भारतीय प्रबंधन संस्थान में भी चल रहा है।
ये कार्यक्रम सोमवार को शुरू हुए और उनका समापन छह अगस्त को होगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम जिला पंचायतों के अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों, पंचायत समितियों के प्रमुखों, सरपंचों और विभिन्न पंचायत अधिकारियों समेत पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है।
पंचायती राज मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के नेतृत्व, प्रबंधन और शासन कौशल को बढ़ाना है। यह पहल स्थानीय शासन को मजबूत करने और पंचायतों को ग्रामीण आबादी को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के वास्ते सशक्त बनाने की पंचायती राज मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर जोर देती है।’’
पांच दिवसीय इस गहन कार्यक्रम में नेतृत्व, प्रबंधन और लोकाचार, ग्रामीण नवाचार, स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आदि के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम में ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में पंचायतों की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया है क्योंकि पंचायतें ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने तथा ग्रामस्तर पर शासन चलाने में जमीनी एजेंसियां हैं।
उसने कहा कि इस कार्यक्रम में खुद के स्रोत राजस्व (ओएसआर) को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है क्योंकि इससे पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत होगी, उसे स्थिरता मिलेगी और वे ‘सक्षम’ पंचायत के रूप में तब्दील होंगी।
भाषा राजकुमार