असम ने हुलॉक गिब्बन के पास तेल अन्वेषण की अनुमति दी, प्रस्ताव केंद्र को भेजा
यासिर अमित
- 30 Aug 2024, 01:47 PM
- Updated: 01:47 PM
गुवाहाटी, 30 अगस्त (भाषा) असम सरकार ने कहा कि उसने वेदांता समूह द्वारा हुल्लोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य के समीप एक तेल अन्वेषण परियोजना को मंजूरी दे दी है तथा प्रस्ताव को विचार के लिए केंद्र के पास भेज दिया है।
वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने कहा कि राज्य वन्यजीव बोर्ड (एसबीडब्ल्यूएल) ने अभयारण्य से 13 किलोमीटर के आसपास तेल अन्वेषण की संभावना का पता लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मंत्री ने यह टिप्पणी बृहस्पतिवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता -- देबब्रत सैकिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए की। मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) को भेज दिया है और वह अंतिम निर्णय लेंगे। अंतिम मंजूरी से पहले हम विशेषज्ञों के साथ चर्चा करेंगे।’’
सैकिया ने सरकार के निर्णय की आलोचना की और कहा कि पर्यावरणविदों ने जंगल में और इसके आसपास तेल अन्वेषण की अनुमति देने के विचार का विरोध किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैकिया ने पूछा, ‘‘इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने असम सरकार से तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एम. के. यादव के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था, जिन्होंने कमांडो बटालियन के गठन के लिए वन भूमि के परिवर्तन की अनुमति दी थी। असम सरकार ने एनजीटी से माफी मांगी। क्या असम सरकार हर बार वन कानूनों का उल्लंघन करेगी और जंगल को नष्ट करेगी और फिर माफी मांगेगी?’’
एनजीटी ने नौ अगस्त को वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करते हुए असम पुलिस की एक कमांडो बटालियन के गठन के लिए ‘गेलेकी रिजर्व फोरेस्ट’ के अंदर भूमि के उपयोग में परिवर्तन पर ‘‘आश्चर्य’’ व्यक्त किया।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सवाल किया गया है कि यादव के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, जिसने ने वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करते हुए वन भूमि के उपयोग में परिवर्तन की अनुमति दी। यादव ने भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति वहां हथियार, गोला-बारूद और अत्याधुनिक हथियारों से लैस 800 कर्मियों के रहने के लिए पक्के निर्माण के लिए दी थी।
हुलोंगपार गिब्बन अभयारण्य जोरहाट जिले में 20.98 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
भाषा
यासिर