साल भर बाड़े में रहने के बाद चीते फिर से जंगल में विचरण के लिए तैयार
नेत्रपाल अविनाश
- 24 Aug 2024, 07:22 PM
- Updated: 07:22 PM
(गौरव सैनी)
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) दुनिया में पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण के तहत भारत लाए गए अफ्रीकी चीते जल्द ही फिर से जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगेंगे। लगभग एक साल पहले उन्हें स्वास्थ्य जांच और निगरानी के लिए मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगल से वापस बाड़ों में भेज दिया गया था।
अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि केंद्र की चीता परियोजना संचालन समिति ने शुक्रवार को फैसला किया कि देश के मध्य भागों से मानसून की वापसी के बाद अफ्रीकी चीतों और भारत में जन्मे उनके शावकों को चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मध्यप्रदेश के अधिकतर इलाकों से अक्टूबर के पहले सप्ताह तक आमतौर पर मानसून लौट जाता है।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति के सदस्यों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अधिकारियों ने कुनो का दौरा किया और चीतों को छोड़ने के विषय पर चर्चा की। बारिश का दौर समाप्त हो जाने के बाद वयस्क चीतों को विभिन्न चरणों में जंगल में छोड़ा जाएगा, जबकि शावकों और मादा चीतों को दिसंबर के बाद छोड़ा जाएगा।’’
अधिकारी के अनुसार, सभी 25 चीते स्वस्थ हैं, जिसमें 13 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं।
आठ चीतों का पहला जत्था नामीबिया से सितंबर 2022 में भारत लाया गया था और बाद में 12 चीतों का दूसरा जत्था दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था।
शुरुआत में चीतों को जंगल में छोड़ दिया गया था, लेकिन ‘सेप्टीसीमिया’ के कारण तीन चीतों -त्बिलिसी (नामीबिया से) नाम की मादा और तेजस तथा सूरज नामक दो दक्षिण अफ्रीकी नर की मौत के बाद पिछले साल अगस्त तक उन्हें वापस बाड़ों में भेज दिया गया था।
‘सेप्टीसीमिया’ एक ऐसा संक्रमण है जो रक्त में जीवाणु के प्रवेश हो जाने से फैलता है।
वर्तमान में पवन नामक केवल एक चीता ही जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उस पर नजर रखना और उसे पकड़ना कठिन है।
भारत आने के बाद से सात वयस्क चीतों, तीन मादा और चार नर की मौत हो चुकी है। इनमें से चार की मौत 'सेप्टीसीमिया’ के कारण हुई। ये सभी मौतें मार्च 2023 से जनवरी 2024 के बीच हुईं।
भारत में 17 शावकों का जन्म हुआ है और उनमें से 12 जीवित बचे हैं। इस प्रकार कुनो में शावकों सहित चीतों की कुल संख्या 25 है जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी वर्तमान में बाड़ों में हैं।
भाषा नेत्रपाल