बलात्कार के मामलों में सख्त सजा और त्वरित फैसले की जरूरत: सैलजा
हक सुरेश
- 24 Aug 2024, 04:02 PM
- Updated: 04:02 PM
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने कोलकाता में एक महिला चिकित्सक के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना की पृष्ठभूमि में कहा है कि देश में इस तरह की जघन्य घटनाओं के अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए ऐसे मामलों में सख्त सजा और त्वरित फैसले की आवश्यकता है।
लोकसभा सदस्य सैलजा ने ‘पीटीआई’ के विशेष कार्यक्रम ‘@4पार्लियामेंट स्ट्रीट’ में समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में यह भी कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगी, क्योंकि इसका अभी निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन सरकारों को बलात्कार के मामलों में बहुत संवेदनशील होने और तुरंत प्रतिक्रिया करने की जरूरत है।
यह पूछे जाने पर कि क्या कोलकाता की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने सही तरीके से कदम उठाए, सैलजा ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो एक महिला के रूप में मुझे इस घटना के विवरण पढ़ने में कई दिन लग गए। एक महिला होने के नाते यह आपको बहुत प्रभावित करता है... यह इतना भयानक था कि मैं इसके बारे में पढ़ना भी नहीं चाहती थी।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की वारदात दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था, "सरकार, किसी भी प्रशासन को बहुत संवेदनशील होना होगा और इससे पहले कि कोई बात बिगड़ जाए, तुरंत प्रतिक्रिया देनी होगी… कई बार आप पाते हैं कि लोगों को बचाया जा रहा है। जहां तक बंगाल की घटना का सवाल है, मुझे लगता है कि यह (जांच) अब भी चल रही है और हम अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं, इसलिए मैं वास्तव में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।’’
सैलजा ने कहा कि इस तरह के मामले में बहुत कुछ रिपोर्ट नहीं किया जाता है और "अगर रिपोर्ट की भी जाती है, तो कौन कार्रवाई करता है?"
उनका कहना था, “मैं चीजों की भयावहता के बारे में जाने बिना कहूंगा, यह हमारे समाज में हो रहा है। ऐसा क्यों होता है कि ऐसे लोग बिना किसी डर के यह (अपराध) करते हैं? यह एक सवाल है जो हम सभी को समाज से, प्रशासन से पूछना चाहिए कि पहले के मामलों में क्या हुआ था।"
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में चिकित्सक के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना पिछले दिनों सामने आई। इसको लेकर कोलकाता और देश के कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे।
भाषा हक