सरकारी विभागों से भुगतान में देरी से वितरण कंपनियों के समक्ष वित्तीय समस्याएं: इक्रा
रमण अजय
- 13 Aug 2024, 07:19 PM
- Updated: 07:19 PM
नयी दिल्ली, 13 अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) सकल तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान में कमी के बावजूद वित्तीय समस्याओं का सामना कर रही हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
एजेंसी ने वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब होने का प्रमुख कारण बिजली आपूर्ति के एवज में राज्य सरकार के विभागों से होने वाले भुगतान में देरी को बताया है। उसने बिजली वितरण खंड के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण बनाये रखा है।
बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और उच्च सब्सिडी भुगतान के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों का अखिल भारतीय समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) नुकसान वित्त वर्ष 2021-22 में घटकर 16.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022-3 में 15.8 प्रतिशत हो गया। जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में यह 23 प्रतिशत था।
इक्रा ने कहा कि इस प्रगति के बावजूद बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में वितरण कंपनियों के लिए घाटा 20 प्रतिशत से अधिक है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र की वितरण कंपनियों का प्रदर्शन आपूर्ति लागत की तुलना में कम शुल्क दर, नियामकीय मंजूरी की तुलना में अधिक एटी एंड सी नुकसान और अधिक कर्ज बोझ के कारण बाधित हुआ है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति के एवज में राज्य सरकार के विभागों से भुगतान प्राप्त करने में देरी उनकी कमजोर वित्तीय स्थिति का कारण है।’’
इक्रा के अनुसार, बिजली वितरण खंड के लिए उसका परिदृश्य नकारात्मक बना हुआ है।
रेटिंग एजेंसी के उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) विक्रम वी ने कहा, ‘‘आम चुनावों के बाद, सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों के लिए शुल्क दर निर्धारण प्रक्रिया में सुधार हुआ है। इस संदर्भ में 28 में से 22 राज्यों ने जुलाई, 2024 तक वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आदेश जारी किये हैं। जबकि केवल 11 राज्यों ने मई, 2024 तक इस संबंध में आदेश जारी किये।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शुल्क बढ़ोतरी औसतन 1.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मामूली बनी हुई है। यह वित्त वर्ष 2023-24 के लिए स्वीकृत 2.5 प्रतिशत से कम है। हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में शुल्क बढ़ोतरी के रुख के बावजूद बिजली खरीद लागत में वृद्धि, कुछ बड़े राज्यों में परिचालन दक्षता की कमी और उच्च कर्ज बोझ के कारण वितरण कंपनियों को घाटा हो रहा है।
भाषा रमण