पश्चिमी घाट के 56 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र के लिए मसौदा अधिसूचना जारी
आशीष देवेंद्र
- 02 Aug 2024, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड के 13 गांवों समेत छह राज्यों में फैले पश्चिमी घाट के 56,800 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने के लिए पांचवीं मसौदा अधिसूचना जारी की है तथा 60 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
यह अधिसूचना 31 जुलाई को जारी की गई थी।
मसौदा अधिसूचना में केरल के 9,993.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव है, जिसमें भूस्खलन प्रभावित जिले के दो तालुका के 13 गांव शामिल हैं।
अधिसूचना में प्रस्तावित ईएसए में गुजरात में 449 वर्ग किमी, महाराष्ट्र में 17,340 वर्ग किमी, गोवा में 1,461 वर्ग किमी, कर्नाटक में 20,668 वर्ग किमी, तमिलनाडु में 6,914 वर्ग किमी और केरल में 9,993.7 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल है।
मसौदा अधिसूचना में रेत खनन समेत सभी तरह की खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि मौजूदा खदानों को ‘‘अंतिम अधिसूचना जारी होने की तारीख से पांच वर्षों के भीतर या मौजूदा खनन पट्टे की समाप्ति पर, जो भी पहले हो’’ चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा।’’
इसमें नयी ताप विद्युत परियोजनाओं पर भी रोक लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा परियोजनाएं चालू रह सकती हैं, लेकिन विस्तार की अनुमति नहीं होगी।
मौजूदा इमारतों की मरम्मत को छोड़कर बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाओं और ‘टाउनशिप’ पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है।
अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘20,000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के निर्मित क्षेत्र के साथ भवन और निर्माण की सभी नयी और विस्तारित परियोजनाएं और 50 हेक्टेयर और उससे अधिक क्षेत्र या 1,50,000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के निर्मित क्षेत्र के साथ सभी नयी और विस्तारित टाउनशिप और क्षेत्र विकास परियोजनाएं प्रतिबंधित होंगी।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में मौजूदा आवासीय मकानों की मरम्मत, विस्तार या नवीनीकरण पर मौजूदा कानूनों और विनियमों के अनुसार कोई प्रतिबंध नहीं होगा।’’
वर्ष 2010 में, केंद्र ने पारिस्थितिक विज्ञानी माधव गाडगिल के नेतृत्व में ‘‘पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति’’ का गठन किया था, ताकि पश्चिमी घाट पर जनसंख्या दबाव, जलवायु परिवर्तन और विकास गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके।
समिति ने 2011 में सिफारिश की थी कि पूरी पर्वत श्रृंखला को ईएसए घोषित किया जाए और उनकी पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के आधार पर तीन पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ईएसजेड) में विभाजित किया जाए।
वर्ष 2013 में, केंद्र ने पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संरक्षण और सतत विकास के लिए उपायों का अध्ययन करने और सिफारिश करने के लिए रॉकेट वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कार्य समूह का गठन किया था। इस समूह ने पश्चिमी घाट के 37 प्रतिशत हिस्से, जो 59,940 वर्ग किलोमीटर में फैला है, को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बताया था।
सरकार ने पश्चिमी घाट में ईएसए पर पांच मसौदा अधिसूचनाएं जारी की हैं, जिनमें से नवीनतम अधिसूचना शुक्रवार को जारी की गई।
भाषा आशीष