न्यायालय ने एलवीबी, डीबीएस की भारतीय शाखा की परिसंपत्तियों के मूल्यांकन संबंधी आदेश पर रोक लगाई
आशीष नेत्रपाल
- 24 Jul 2024, 10:17 PM
- Updated: 10:17 PM
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को राहत देते हुए बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उसे नकदी संकट से जूझ रहे लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) और सिंगापुर के डीबीएस बैंक की भारतीय सहायक कंपनी के शेयर, परिसंपत्तियों और निवेशक बॉण्ड का मूल्य निर्धारित करने के लिए कहा गया था।
एलवीबी और सिंगापुर बैंक की भारतीय शाखा डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के विलय के प्रस्ताव को 2020 में मंजूरी दी गई थी।
शीर्ष अदालत ने निवेशकों की इस दलील को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि यदि उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई गई तो लगभग 92,000 लोग अपना पैसा खो देंगे। न्यायालय ने कहा कि विलय में एक विदेशी बैंक शामिल है और इसे रोकने से ‘‘व्यापक प्रभाव पड़ेगा तथा विदेशी निवेशकों का हमारे नियामक तंत्र में विश्वास खत्म हो जाएगा।’’
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी तथा निवेशकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ओम कैपिटल और अन्य को उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ आरबीआई और डीबीएस बैंक की अलग-अलग अपील पर नोटिस जारी किया।
पीठ ने उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा और उसके बाद अंतिम सुनवाई के लिए याचिकाओं को सूचीबद्ध कर दिया।
आरबीआई की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बैंकों के एकीकरण को नियंत्रित करने वाले कानूनों का हवाला दिया और कहा कि निवेशक, जो सामान्य जमाकर्ताओं की तुलना में अपने पैसे पर अधिक रिटर्न पा रहे थे, डीबीएस के साथ बैंक के विलय के मामले में उनके द्वारा किए गए निवेश को खो देंगे।
मेहता ने कहा, ‘‘बॉण्ड धारकों को कभी भी सामान्य जमाकर्ताओं के समान नहीं माना जाता है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा बैंक के कदम उठाने से पहले 12 भारतीय बैंकों ने नकदी संकट से जूझ रहे एलवीबी को बचाने के लिए कदम उठाने से इनकार कर दिया था।
मद्रास उच्च न्यायालय ने आरबीआई द्वारा लिए गए निर्णय और नवंबर 2020 में केंद्र द्वारा अनुमोदित एलवीबी को डीबीआईएल के साथ विलय करने के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने आरबीआई को निर्देश दिया था कि वह विलय से पहले की तारीख तक डीबीआईएल और एलवीबी दोनों के शेयर और परिसंपत्तियों का मूल्य निर्धारित करे तथा उस आधार पर शेयर के मूल्य में कमी और टियर दो बॉण्ड को बट्टे खाते में डालने पर नए सिरे से निर्णय ले।
भाषा आशीष