दिल्ली में रोज करीब 700 लोग साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं: साइबर अपराध प्रकोष्ठ के डीसीपी ने कहा
आशीष अविनाश
- 19 Jul 2024, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) साइबर अपराध प्रकोष्ठ के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने शुक्रवार को कहा कि अकेले राष्ट्रीय राजधानी में हर दिन कम से कम 700 लोग साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं और पिछले 18 महीनों में यह समस्या काफी बढ़ गई है।
पुलिस उपायुक्त (आईएफएसओ, जिसे साइबर अपराध इकाई भी कहा जाता है) हेमंत तिवारी ने यहां पीटीआई मुख्यालय में एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में कहा कि साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर औसतन प्रति माह 55,000 से 60,000 कॉल या प्रतिदिन 1,700 कॉल आती हैं, जिनमें से 700 से 800 नयी शिकायतें प्रतिदिन होती हैं।
अकेले दिल्ली के ये आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या पूरे देश में कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। डीसीपी ने कहा, ‘‘ये कॉल ज्यादातर वित्तीय और अन्य विविध धोखाधड़ी से संबंधित हैं। वास्तव में, इन 700 कॉल में से 200-250 वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित हैं। साइबर अपराधी आमतौर पर तीन चीजों-अज्ञानता, लालच और पीड़ित के डर का फायदा उठाते हैं। धोखाधड़ी और चोरी जैसे पारंपरिक अपराध अब साइबर स्पेस में भी फैल गए हैं।’’
तिवारी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस ने हाल में एक ऐसे मामले की जांच की जिसमें एक व्यक्ति को सिर्फ इसलिए 22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ क्योंकि वह अपना निवेश दोगुना करना चाहता था।
अन्य कॉल ‘सेक्सटॉर्शन’ (यौन उत्पीड़न के मामलों में फंसाने का डर दिखाना), ‘डिजिटल अरेस्ट’ (धन उगाही के लिए ऑनलाइन डराना-धमकाना), मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिये धोखाधड़ी और घर से काम करने के अवसर देने के बहाने धोखाधड़ी आदि से संबंधित हैं।
तिवारी के पास एमबीबीएस की डिग्री भी है और वह एक समय दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा संचालित हिंदू राव अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट के रूप में काम कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि धोखेबाज पीड़ितों को ईमेल भी भेजते हैं जिसमें कहा जाता है कि उन्हें ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ वेबसाइट खंगालते हुए पाया गया है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे कई मामलों की जांच करते हुए, इकाई 180 गिरफ्तारियां करने में सफल रही है।
दिल्ली पुलिस ने इस साल जनवरी से अब तक 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा की वित्तीय धोखाधड़ी की जांच की है, जबकि आईएफएसओ इकाई 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
तिवारी ने बताया कि इकाई खास तौर पर उन मामलों की जांच करती है, जहां 50 लाख रुपये या उससे ज़्यादा की धोखाधड़ी की गई है। आईएफएसओ इकाई के अलावा हर पुलिस जिले में एक साइबर इकाई होती है।
भाषा आशीष