हरियाणा न्यायिक परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में अभियोजन पक्ष ने बहस पूरी की
प्रशांत अविनाश
- 16 Jul 2024, 09:41 PM
- Updated: 09:41 PM
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक) प्रारंभिक परीक्षा 2017 के कथित प्रश्नपत्र लीक से संबंधित मामले में अभियोजन पक्ष ने मंगलवार को निचली अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पूरी कर लीं।
केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ की ओर से अभियोजन पक्ष ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना के समक्ष कहा कि यह स्पष्ट मामला है, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री साफ तौर से स्थापित करती है कि एचसीएस (न्यायिक) प्रारंभिक परीक्षा-2017 का प्रश्नपत्र तत्कालीन रजिस्ट्रार (भर्ती) बलविंदर कुमार शर्मा द्वारा लीक किया गया था।
विशेष लोक अभियोजक चरणजीत सिंह बख्शी ने तर्क दिया कि आरोपियों के खिलाफ घटनाक्रम निर्णायक था, जिससे कोई संदेह नहीं रह गया जिसके आधार पर आरोपी किसी राहत का दावा कर सकें।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि मौखिक, इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य से यह स्थापित होता है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा का प्रश्नपत्र अपनी करीबी मित्र सुनीता को सौंप दिया था, जिसने अवैध लाभ के लिए इसे कई संभावित उम्मीदवारों के साथ साझा किया।
याचिका में दावा किया गया है कि आरोपियों का कृत्य ऐसा था जिसमें किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है क्योंकि उनके “घृणित कृत्यों ने जनता की चेतना, न्यायपालिका की संस्था में विश्वास और भरोसे को हिलाकर रख दिया है और इससे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की छवि भी धूमिल हुई है”।
शर्मा ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 (आरोपी का बयान) के तहत अपने बयान में दावा किया था कि परीक्षा के प्रश्नपत्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय समिति के पास थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम प्रश्नपत्र न्यायाधीश के कब्जे में थे और उनके निर्देश पर उन्हें फंसाने के लिए फर्जी जांच का आदेश दिया गया।
अदालत ने मामले को आगे की बहस के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है, जब आरोपी अपनी दलील पेश करेंगे।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की कार्यवाही पूरी करने के लिए निचली अदालत को मई में तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया था। इससे पहले उसने निर्देश दिया था कि मामले की सुनवाई रोजाना की जाए।
इस मामले में 19 आरोपी और 85 गवाह हैं।
प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की शिकायत पर 2017 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पर्चा लीक के बाद शर्मा को 2017 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया था।
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