जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने डीजीपी पर आतंकवादियों से साठगांठ का आरोप लगाया
प्रशांत पवनेश
- 16 Jul 2024, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
श्रीनगर, 16 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने मंगलवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर.आर. स्वैन की उस हालिया टिप्पणी की आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि क्षेत्रीय संगठन “राजनीतिक लाभ” के लिए आतंकवादी सरगनाओं के साथ गठजोड़ कर रहे हैं।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जहां स्वैन की बर्खास्तगी की मांग की, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने पुलिस प्रमुख की टिप्पणी को अनुचित और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए बलिदान का अपमान बताया।
स्वैन ने सोमवार को दावा किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के चरम के दौरान जम्मू-कश्मीर में समाज के विभिन्न तबकों में घुसपैठ की और क्षेत्रीय दलों ने राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवादी सरगनाओं को बढ़ावा दिया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश के लिए अपने बलिदान को रेखांकित किया और स्वैन के बयान की निंदा की। इसके कश्मीर जोन प्रमुख नासिर सोगामी ने मकबूल शेरवानी और मोहम्मद यूसुफ हलवाई का उदाहरण दिया।
सोगामी ने कहा, “यह बयान देकर डीजीपी ने मकबूल शेरवानी जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं के महान बलिदान का अपमान किया है, जिन्होंने 1948 में कश्मीर में भारतीय सेना की लैंडिंग को आसान बनाने के लिए दो दिनों तक पाकिस्तानी हमलावरों को गुमराह किया था, साथ ही मोहम्मद यूसुफ हलवाई का भी अपमान किया है, जिन्होंने 1989 में स्वतंत्रता दिवस पर आतंकवादी समूहों द्वारा ‘ब्लैकआउट’ के फरमान को मानने से इनकार कर दिया था।”
उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के 3,000 से अधिक नेताओं ने देश की अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।
स्वैन को हटाने की मांग करते हुए मुफ्ती ने क्षेत्र में युवा सैन्य अधिकारियों की बढ़ती मौतों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने डीजीपी पर स्थानीय लोगों के साथ “पाकिस्तानियों” जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया।
पीडीपी प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों में “पिछले 32 महीनों में 50 सैनिकों की मौत” के लिए जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि “अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए थी” और डीजीपी को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, कोई जवाबदेही नहीं है...।’’
कांग्रेस, माकपा और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने स्वैन के बयान की निंदा की तथा उनसे उनके पेशेवर दायित्वों पर ध्यान केंद्रित करने और राजनीतिक टिप्पणी से बचने का आग्रह किया।
भाषा प्रशांत