दिल्ली विधिज्ञ परिषद ने बारिश के कारण कार्यालय में पानी भरने का मुद्दा उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया
सुरेश माधव
- 16 Jul 2024, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली विधिज्ञ परिषद (बीसीडी) ने पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी में भारी बारिश के बाद सिरी फोर्ट इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित अपने कार्यालय में पानी भर जाने की घटना का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने मंगलवार को नगर निगम अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश दिया।
परिषद ने कहा कि 27 और 28 जून की रात को हुई बारिश के बाद उसके कार्यालय के तलघर (बेसमेंट) में 10 फुट से अधिक पानी भर गया, जिसके कारण न केवल इमारत को नुकसान पहुंचा, बल्कि इसका सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग द्वारा संग्रहीत डेटा भी नष्ट हो गया।
न्यायमूर्ति संजीव नरूल ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की विश्व स्तरीय शहर की छवि पूरी तरह से खराब हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अधिकारियों को क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण करने और सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों के वकील ने कहा कि 27 जून को शहर में रिकॉर्ड बारिश हुई और वे (अधिकारी) याचिकाकर्ता की शिकायत के संबंध में उचित कार्रवाई करेंगे।
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘अधीक्षक अभियंता से नीचे के रैंक के अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता के परिसर और आसपास के क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण किया जाए।’’
इसने कहा, ‘‘अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। प्रतिवादियों को उपचारात्मक उपाय करने के लिए अदालत के आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।’’
अदालत ने कहा कि निरीक्षण के दौरान परिषद के मानद सचिव भी मौजूद रहेंगे।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि बारिश के बाद पास का एक नाला ‘ओवरफ्लो’ हो गया, क्योंकि इसकी सफाई नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘नाला आज भी साफ नहीं है। उन्होंने इसे साफ नहीं किया है। केवल यही निर्देश (मांगा गया है) है कि वे नाले को साफ करें।’’
परिषद ने याचिका में अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था करने और एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश देने की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसा संकट न हो।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसने हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों से गाद निकालने का काम करने और जलभराव रोकने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
भाषा सुरेश