लंबे समय तक कबूतर के पंख और बीट के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य जोखिम का पता चला
नेत्रपाल अविनाश
- 11 Jul 2024, 07:51 PM
- Updated: 07:51 PM
नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) लंबे समय तक कबूतर के पंख और बीट के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यह जानकारी एक नए अध्ययन से सामने आयी है।
यह अध्ययन एक लड़के से जुड़ा है जो लंबे समय तक कबूतर के पंख और बीट के संपर्क में रहने के कारण घातक एलर्जी की चपेट में आ गया था।
अध्ययन से जुड़े चिकित्सकों ने कहा कि पूर्वी दिल्ली के 11 वर्षीय एक बच्चे को यहां सर गंगा राम अस्पताल में लाया गया था और शुरू में उसके लक्षण आम खांसी की तरह थे।
उन्होंने एक बयान में कहा कि हालांकि श्वसन क्रिया में गिरावट के कारण उसकी हालत खराब हो गई।
गहन बाल चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) के सह-निदेशक डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा कि बच्चे को ‘हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस’ (एचपी) होने का पता चला जो कबूतर से संबंधित प्रोटीन से एलर्जी की वजह से हुआ था और उसे तत्काल उचित उपचार की आवश्यकता थी।
गुप्ता ने बताया कि एचपी फेफड़े से संबंधित बीमारी है जिसमें सांस लेना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति वयस्कों में अधिक आम है और बच्चों में दुर्लभ होती है, जो एक वर्ष में प्रति एक लाख आबादी पर दो से चार लोगों को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि लड़के को ‘स्टेरॉयड’ दवा दी गई और उच्च-प्रवाह ऑक्सीजन थेरेपी के माध्यम से सांस लेने में सहायता प्रदान की गई, जिसमें प्राणवायु को नाक में ट्यूब के माध्यम से शरीर में भेजा जाता है। गुप्ता ने अध्ययन में कहा कि इससे उसके फेफड़ों में सूजन कम करने और सांस लेने को लगभग सामान्य स्तर पर लाने में मदद मिली।
गुप्ता ने कहा कि लड़के पर उपचार का सकारात्मक असर देखते हुए व्यापक देखभाल योजना के साथ उसे छुट्टी दे दी गई।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा कि एचपी की स्थिति कुछ पर्यावरणीय पदार्थों- जैसे पक्षी संबंधी पदार्थ, फफूंद और कवक के बार-बार संपर्क में आने के कारण होती है।
गुप्ता ने बताया कि ई-सिगरेट के द्वितीयक संपर्क से भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
गुप्ता ने कहा कि त्वरित कार्रवाई से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पक्षियों की बीट और पंखों जैसे संभावित पर्यावरणीय कारकों के बारे में शिक्षा आवश्यक है।’’
गुप्ता ने हानिकारक नहीं दिखने वाले कबूतरों और कुक्कुट पक्षियों के पास रहने के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भाषा नेत्रपाल