उत्तर प्रदेश में किसान बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी, अब सालाना 60 हजार रुपये मिलेंगे
IANS
- 18 Oct 2026, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
लखनऊ, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले किसान परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की सीटों की संख्या दोगुनी कर दी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि मेधावी किसान परिवारों और कृषि मजदूरों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की ओर से संचालित इस योजना के तहत अब प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय और संस्थान में 45 के बजाय 90 विद्यार्थियों को तथा प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 के बजाय 30 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। मेधावी विद्यार्थियों को अब सालाना 60,000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के अधिक बच्चों को कृषि शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल मंडी परिषद राज्य के 11 कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों तथा 61 कृषि महाविद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को इस योजना के तहत छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इसके अलावा, प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को अब सालाना 36,000 रुपये के बजाय 60,000 रुपये मिलेंगे। यानी छात्रवृत्ति राशि में 24,000 रुपये सालाना की वृद्धि की गई है। इससे विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
मंडी परिषद के अनुसार, वित्त वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।
छात्रवृत्ति की सीटों और आर्थिक सहायता में हालिया बढ़ोतरी से अब अधिक विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। संशोधित व्यवस्था के तहत कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्नातक कृषि पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति सीटों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है। वहीं, स्नातक गृह विज्ञान पाठ्यक्रमों के लिए सीटें छह से बढ़ाकर 12 की गई हैं।
स्नातकोत्तर कृषि पाठ्यक्रमों के लिए सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और स्नातकोत्तर गृह विज्ञान पाठ्यक्रमों के लिए चार से बढ़ाकर आठ कर दी गई हैं। कृषि महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए पांच से बढ़ाकर 10 कर दी गई हैं।
कृषि के अलावा, इस योजना में बागवानी, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों की पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थी भी शामिल हैं। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस पहल के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि पृष्ठभूमि वाले परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।