उपचुनावों में बांग्ला भाषी मुसलमानों ने भाजपा को वोट दिया, वे सरकार के साथ रहना चाहते हैं: शुभेंदु
अविनाश
- 09 Oct 2026, 09:33 PM
- Updated: 09:33 PM
कोलकाता, नौ अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बांग्ला भाषी मुसलमानों ने बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वोट दिया। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोगों को भाजपा में अपने मित्र मिले हैं और वे सरकार के साथ खड़े रहना चाहते हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा को रेजीनगर में लगभग 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले। अधिकारी ने कहा, ''अल्पसंख्यकों ने बड़ी संख्या में मतदान किया है, क्योंकि वे सरकार के साथ खड़े रहना चाहते हैं।''
उन्होंने कहा, "हमें रेजीनगर में लगभग 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले। बांग्ला भाषी मुसलमान भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं। उन्हें हम लोगों में अपने मित्र मिल गए हैं और वे समझ गए हैं कि उन्हें गुमराह किया गया था।''
निर्वाचन आयोग के अनुसार, नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार हसिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को रिकॉर्ड 1,22,753 मतों के अंतर से हराया। हसिरानी रथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिनकी हत्या कर दी गई थी।
हसिरानी रथ को 1,64,427 वोट मिले, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन वाले प्रधान को 41,674 मत प्राप्त हुए। भाकपा उम्मीदवार शांति गोपाल गिरि 5,779 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जीत का यह अंतर 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से शुभेंदु की 9,665 मतों की जीत से कहीं अधिक है। बाद में, शुभेंदु ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव कराना पड़ा।
हसिरानी रथ की उम्मीदवारी से भावनात्मक पहलू भी जुड़ा था। उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की छह मई को कोलकाता के बाहरी इलाके मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। यह घटना विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के महज दो दिन बाद हुई थी।
भाजपा ने मुर्शिदाबाद जिले के मुस्लिम बहुल रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल की। यहां पार्टी के उम्मीदवार शंकरव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रत्याशी गुलाम नबी आजाद को 75,816 मतों से हराया।
शंकरव सरकार को 1,29,914 वोट मिले, जबकि आजाद को 54,098 मत प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा उम्मीदवार को करीब 63.14 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एजेयूपी उम्मीदवार को 26.29 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफ़ी को 6,168 वोट मिले। वह ममता टीएमसी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी से मामूली अंतर से आगे रहे, जिन्हें 3,847 मत प्राप्त हुए, जबकि अलग हुए धड़े डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (डीटीएमसी) के सफीउज्जमां शेख को 2,044 मत प्राप्त हुए। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को 3,797 वोट मिले।
रेजीनगर में भाजपा की वोट हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत और नंदीग्राम में 50 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई, जो दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी समीकरण में बड़े बदलाव का संकेत है।
भाजपा की यह जीत 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से बिल्कुल अलग रही। उस चुनाव में एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रेजीनगर सीट 58,000 से अधिक मतों के अंतर से जीती थी।
टीएमसी के पूर्व नेता कबीर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने के प्रस्ताव पर विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने एजेयूपी की स्थापना की, जिससे इस निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक मुकाबला बदल गया।
नंदीग्राम के नतीजों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्वाचन क्षेत्र की जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकासोन्मुख राजनीति और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं, पर फिर अपना भरोसा जताया है।
क्या नंदीग्राम में कांग्रेस का दूसरे स्थान पर रहना पार्टी की वापसी का संकेत है? इस सवाल पर अधिकारी ने ऐसी किसी भी संभावना को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, ''कांग्रेस एक मृत पार्टी है। राहुल गांधी के एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने पर भी पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा।''
उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से पार्टी को सहानुभूति के वोट हासिल करने में मदद मिली थी।
अधिकारी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। समग्र चुनावी नतीजों पर उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रदर्शन मतदाताओं की सोच में बदलाव और सरकार के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मुस्लिम समुदाय, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों को यह एहसास हो गया है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
अधिकारी ने कहा, ''पश्चिम बंगाल में विभाजनकारी राजनीति करने वाले और चुनाव से पहले लोगों से यह कहने वाले कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो मुसलमानों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा और उन्हें अपने धर्म का पालन करने से रोका जाएगा, पिछले पांच महीनों में बेनकाब हो गए हैं। यही वजह है कि अब वे लोग मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और हमारे साथ मित्रता स्थापित करना चाहते हैं।''
उन्होंने दावा किया कि अन्नपूर्णा योजना की महिला लाभार्थियों ने भी दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भाजपा के पक्ष में मतदान किया। उनके अनुसार, ऐसा करने वाली महिलाओं में विभिन्न धर्मों की महिलाएं शामिल थीं।
उन्होंने कहा, ''नंदीग्राम में अन्नपूर्णा योजना की लगभग 70,300 महिला लाभार्थियों और रेजीनगर में लगभग 70,000 महिला लाभार्थियों ने अपने परिवारों के साथ भाजपा को वोट दिया, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम। अगर रेजीनगर में इस योजना की 35,000 अल्पसंख्यक मुस्लिम महिला लाभार्थियों ने अपने परिवारों के साथ हमें वोट न दिया होता, तो हम इतनी बड़ी जीत कभी हासिल नहीं कर पाते।''
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उपचुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुए, जबकि राज्य में पिछले चुनावों के दौरान हिंसा की घटनाएं हुई थीं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि माकपा और तृणमूल कांग्रेस ने पहले मुसलमानों के मन में यह डर पैदा करने की कोशिश की थी कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया, ''माकपा और ममता बनर्जी ने मुसलमानों को यह विश्वास दिलाया था कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा और 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी भाजपा को रोक देगी।''
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को लेकर हुए विवाद के लिए भी (ममता) बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में रखे गए थे। उन्होंने पूछा, ''उनसे उच्चतम न्यायालय का रुख करने के लिए किसने कहा था?''
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश
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