सिक्किम : एसडीएफ के एकमात्र विधायक सत्तारूढ़ एसकेएम में शामिल
जितेंद्र नेत्रपाल
- 10 Jul 2024, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
गंगटोक, 10 जुलाई (भाषा) सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के एकमात्र विधायक तेनजिंग नोरबू लाम्था बुधवार को सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) में शामिल हो गए। लाम्था ने दावा किया कि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग नीत एसकेएम के पक्ष में भारी जनसमर्थन है।
लाम्था के एसकेएम में शामिल होने के बाद सिक्किम विधानसभा में विपक्ष खत्म हो गया क्योंकि राज्य की सभी 32 सीट पर एसकेएम का कब्जा हो गया।
लाम्था ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने अपने क्षेत्रवासियों से सलाह ली और उन्होंने मुझे एसकेएम में शामिल होने का सुझाव दिया क्योंकि माहौल और जनसमर्थन सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में है।”
लाम्था ने तमांग के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, “एसकेएम सरकार ने पिछले पांच वर्षों में राज्य के विकास और लोगों के कल्याण के लिए जबरदस्त काम किया है। इसलिए जनता ने सत्तारूढ़ पार्टी के प्रदर्शन को सराहते हुए भारी बहुमत दिया है।”
श्यारी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए सिंह ने दावा किया कि लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सिक्किम विधानसभा में और बाहर एसकेएम का विरोध करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
इससे पहले सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने ‘फेसबुक’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘मुझे आज अपने सरकारी आवास पर 23-स्यारी विधानसभा सीट के विधायक तेनजिंग नोरबू लाम्था से मिलकर बेहद खुशी हुई। वे आधिकारिक तौर पर हमारे एसकेएम परिवार में शामिल हो गए हैं।’’
तमांग ने माना कि लाम्था ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के हितों से जुड़ी चिंताएं जाहिर की थीं। उन्होंने कहा कि एक व्यापक विकास योजना के हिस्से के रूप में अब इस निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को हल किया जाएगा।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में लाम्था एसडीएफ के एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने जीत हासिल की। उन्होंने एसकेएम के वरिष्ठ नेता एवं शिक्षा मंत्री कुंगा नीमा लेप्चा को 1,314 मतों के अंतर से हराया था।
दो जून को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही उनके एसकेएम में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
जब उनसे भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा गया तो लाम्था ने कहा था, ‘‘मैं जनता से सलाह करने के बाद आगे कदम उठाऊंगा।’’
एसकेएम ने 32 सदस्यीय विधानसभा में 31 सीट पर जीत हासिल की थी जबकि विपक्षी एसडीएफ को सिर्फ एक सीट मिली थी।
भाषा जितेंद्र