झारखंड में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन तेज, मुख्यमंत्री सोरेन ने बातचीत की पेशकश की
नेत्रपाल
- 06 Aug 2026, 01:02 AM
- Updated: 01:02 AM
रांची, पांच अगस्त (भाषा) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर बुधवार को छात्रों ने अपना विरोध और तेज कर दिया तथा पांच और प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रश्न पत्र लीक होने का मुद्दा एक राष्ट्रीय समस्या है और उन्होंने इस गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत का प्रस्ताव दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे देवेंद्र नाथ महतो से बुधवार को बातचीत की और उनसे पानी पीने की अपील की।
वांगचुक की अपील मानते हुए महतो ने अपने अनशन के चौथे दिन पानी पिया। इस बीच, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सुधार मंच के बैनर तले पांच अन्य लोगों ने मंगलवार रात से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। विधानसभा के बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले आंदोलन तेज हो गया है।
इसके साथ ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो पिछले चार दिन से इसी स्थान पर अनशन कर रहे हैं।
हाल में दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर 26 दिन का अनशन कर चुके वांगचुक ने महतो को सलाह दी कि उनका रक्त शर्करा और रक्तचाप का स्तर लगातार गिर रहा है, इसलिए कम से कम पानी अवश्य पिएं। उनकी सलाह पर महतो ने पानी पिया।
प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा रद्द करने, आयोग तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में सुधार लागू करने की 25 जुलाई से मांग कर रहे हैं।
वे परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराने की भी मांग कर रहे हैं।
जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने कहा, ''हमारी मांगों के समर्थन में मंगलवार रात से दो महिलाओं सहित हमारे पांच साथी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।''
भूख हड़ताल कर रहीं सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार उनकी मांगें नहीं मान रही है, इसलिए उन्हें इस प्रकार का आंदोलन करने के लिए ''मजबूर'' होना पड़ा।
वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी हबीबा ने कहा, ''मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक जैसे हैं। जब बच्चे भूखे होते हैं तो अभिभावकों को भी पीड़ा होती है। इसलिए हमें उम्मीद है कि वह हमारी शिकायतों और मांगों पर ध्यान देंगे।''
उन्होंने कहा, ''मुख्यमंत्री कहते हैं कि सरकार संवेदनशील है। हो सकता है, लेकिन हमें आश्वासन नहीं, कार्रवाई और न्याय चाहिए।''
जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ हुआ, राज्य प्रशासन ने बातचीत के ज़रिए गतिरोध खत्म करने की कोशिशें शुरू कीं।
रांची के उप-संभागीय अधिकारी कुमार रजत और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) धनंजय कुमार ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत का न्योता दिया।
रजत ने कहा, ''छात्रों ने प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा है।''
बातचीत के लिए प्रशासन की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, ''हमारी मांग है कि बातचीत सबके सामने हो, या बंद कमरे में बैठक के बजाय इसका सीधा प्रसारण किया जाए।''
वहीं, एक अन्य छात्र नेता प्रेम सागर ने कहा, ''चूंकि हमारे मुख्यमंत्री 'सरकार आपके द्वार' पहल को बढ़ावा देते हैं, इसलिए हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री प्रदर्शन स्थल पर आएं।''
इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सिर्फ राज्य का नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय समस्या है।
सोरेन ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सोरेन ने 'एक्स' पर लिखा, ''मेरे युवा दोस्तों की चिंताएं हमारे लिए बहुत गंभीर मामला है। कथित पेपर लीक सिर्फ झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश भर के कई राज्यों के युवाओं के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन गया है। हमारी सरकार इस मामले पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है।''
उन्होंने कहा कि एजेंसियां दिन-रात जांच कर रही हैं और दोषियों को जेल भेजा जा रहा है।
सोरेन ने कहा, ''हमारा मकसद सिर्फ जांच करना नहीं, बल्कि अपने युवा दोस्तों को पूरी तरह से समाधान देना है।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''झारखंड सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। कोई भी छात्र या अभ्यर्थी, जिसकी कोई मांग या सुझाव हो, वह राज्य सरकार के सामने अपनी बात रख सकता है। उनकी हर बात पूरी गंभीरता से सुनी जाएगी।''
सोरेन ने बताया कि उन्होंने दिन में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भी मुलाकात की और उन्हें छात्रों के प्रदर्शन समेत राज्य के मौजूदा हालात के बारे में अवगत कराया।
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा, ''सरकार को 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करनी चाहिए और मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।''
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार ने झारखंड सरकार से कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने, जेपीएससी के सभी अधिकारियों को हटाने और हाल में आयोजित परीक्षाओं के परिणाम रद्द करने की मांग की।
हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस प्रमुख सहयोगी दल है।
इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि कथित अनियमितताओं के मामले में झारखंड पुलिस का अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच जेपीएससी ने ''अपरिहार्य परिस्थितियों'' का हवाला देते हुए 25 से 27 जुलाई तक प्रस्तावित संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी थी।
सीआईडी ने 28 जुलाई से अब तक जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से चार बार पूछताछ की है और जांच के सिलसिले में रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की है।
भाषा शफीक नेत्रपाल
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