बांग्लादेश: हसीना का पूर्व आधिकारिक आवास 'संग्रहालय' बना; 'जुलाई जन विद्रोह दिवस' मनाया गया
नरेश
- 05 Aug 2026, 08:03 PM
- Updated: 08:03 PM
ढाका, पांच अगस्त (भाषा) देशभर में कड़ी सुरक्षा के बीच, बांग्लादेश सरकार ने 2024 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के पीड़ितों की याद में बुधवार को एक स्मारक संग्रहालय भवन का उद्घाटन किया। यह भवन पहले देश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का आधिकारिक आवास था। इन प्रदर्शनों के कारण ही शेख हसीना की सरकार गिर गई थी।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 'गणभवन' में 'जुलाई जन विद्रोह स्मारक संग्रहालय' का उद्घाटन किया। हसीना के शासनकाल के दौरान 'गणभवन' प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास हुआ करता था। दो साल पहले पांच अगस्त को ही शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गई थीं और संग्रहालय का उद्घाटन आज ही के दिन हुआ है।
संग्रहालय की पट्टिका का अनावरण करते हुए रहमान ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, ''फासीवाद विरोधी आंदोलन के दौरान हत्याएं करने वालों पर कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से मुकदमा चलाया जाएगा।''
इस दौरान अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यूनुस भी उनके साथ मौजूद थे।
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सरकारी संस्थानों का नाम इस विद्रोह में मारे गए कार्यकर्ताओं और 2009 से हसीना की अवामी लीग के शासनकाल के दौरान मारे गए लोगों के नाम पर रखा जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच 1,400 लोग मारे गए थे। इस अवधि को 'जुलाई विद्रोह' के रूप में जाना जाता है, जब हसीना सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के जरिये कार्रवाई का आदेश दिया था।
नौकरियों में विवादित आरक्षण प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पांच अगस्त 2024 को हसीना भारत चली गईं, जिसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला था।
यूनुस सरकार द्वारा गठित एक विशेष न्यायाधिकरण ने नवंबर 2025 में "मानवता के खिलाफ अपराध" और "नरसंहार" के आरोपों में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में फांसी की सजा सुनाई थी। उनके अंतरिम शासन ने एक कार्यकारी आदेश के तहत हसीना की अवामी लीग पार्टी पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार ने 12 फरवरी के चुनावों के बाद भी इस फैसले का समर्थन किया था।
सरकारी समाचार एजेंसी 'बांग्लादेश संवाद संस्था' (बीएसएस) के अनुसार, बांग्लादेश पांच अगस्त को 'जुलाई जन विद्रोह दिवस' के रूप में मना रहा है।
ढाका ट्रिब्यून की एक खबर के अनुसार, 'जुलाई जन विद्रोह' की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक सरकारी समारोह बुधवार को उस समय विरोध प्रदर्शन में बदल गया, जब दर्शकों ने सरकार पर एक आधिकारिक वृत्तचित्र के जरिए आंदोलन के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। इसके चलते मंत्रियों को माफी मांगने और तुरंत सुधार करने का वादा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
खबर के अनुसार, यह अनपेक्षित हंगामा 'बांग्लादेश-चीन मैत्री सम्मेलन केंद्र' में कार्यवाहक राष्ट्रपति हफीज उद्दीन अहमद बीर विक्रम की मौजूदगी में हुआ। यहां वृत्तचित्र के प्रदर्शन के बाद जुलाई विद्रोह में मारे गए लोगों के परिवारों, घायल प्रदर्शनकारियों, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ''फर्जी, फर्जी'' के नारे लगाते हुए कार्यक्रम में व्यवधान डाला।
इस आयोजन के बीच नयी दिल्ली स्थित 'फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया' (एफसीसी) से शेख हसीना का वर्चुअल संबोधन बांग्लादेश में भारी बेचैनी का कारण बना।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने पहले मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी थी कि शेख हसीना के भाषण को प्रकाशित या प्रसारित करने वालों को सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा था कि यह 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण' (आईसीटी-बीडी) के सक्रिय प्रतिबंध का सीधा उल्लंघन होगा, जिसने हसीना को मौत की सजा सुनाई है।
हालांकि, आईसीटी-बीडी के मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम ने स्पष्ट किया कि हसीना के बयानों के प्रसारण या प्रकाशन पर कोई पूर्ण कानूनी प्रतिबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण ने बांग्लादेशी मीडिया को केवल ऐसी टिप्पणियां प्रसारित करने से रोका है जिनमें नफरती भाषण शामिल हो या जो विशेष अदालत की गरिमा और छवि को ठेस पहुंचाती हों।
भाषा सुमित नरेश
नरेश
0508 2003 ढाका