कॉजपा प्रदर्शन में कांग्रेस और आप के बीच मतभेद सामने आया
रंजन
- 23 Jul 2026, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
(सौरभ राय बर्मन)
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के मंच पर आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच प्रदर्शन का श्रेय लेने के आरोप को लेकर चल रहा तनाव खुलकर सामने आ गया।
दोनों दलों के बीच मतभेद बुधवार को उस समय साफ तौर पर सामने आ गया, जब आम आदमी पार्टी (आप) के एक नेता और कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले एक कार्यकर्ता के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कैमरों की नजर से दूर हुई इस तीखी नोकझोंक ने उस प्रदर्शन पर राजनीतिक स्वामित्व स्थापित करने की होड़ को उजागर कर दिया, जो हाल के वर्षों में युवाओं के नेतृत्व में हुए सबसे बड़े आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है।
जून 2025 में 'इंडिया' गठबंधन से बाहर निकल गयी आप का मानना है कि इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस का समर्थन बहुत देर से मिला । उससे भी अहम बात यह है कि यह समर्थन ऐसी शर्तों पर मिला, जिनसे पार्टी को लगता है कि आंदोलन कमज़ोर पड़ गया।
आप के एक नेता ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया इकोसिस्टम के जरिए शुरू से ही इस आंदोलन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। जब यह विमर्श काम नहीं आया, तो उसने कहना शुरू कर दिया कि भीड़ नहीं थी और आंदोलन फ़्लॉप रहा। जब आंदोलन ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली, तो कांग्रेस ने उस पर कब्ज़ा करने की कोशिश की।''
आप नेता के अनुसार, कांग्रेस समर्थकों ने आरंभ में सोशल मीडिया पर इस अभियान को 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) 2.0' के रूप में पेश करने की कोशिश की।
'इंडिया एगेंस्ट करप्शन' आंदोलन से ही आम आदमी पार्टी (आप) का उदय हुआ था।
संप्रग सरकार की सत्ता से विदाई में अहम भूमिका निभाने वाला यही आंदोलन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच अविश्वास की सबसे बड़ी वजह माना जाता है।
कांग्रेस का मानना है कि इस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का परोक्ष समर्थन प्राप्त था।
दोनों दलों के बीच अविश्वास उस समय और गहरा गया, जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (आप) का गठन किया। आप ने 2013 में दिल्ली में कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। इसके बाद 2022 में पंजाब में भी कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया और उसी वर्ष गुजरात में पांच विधानसभा सीट जीतने तथा करीब 13 प्रतिशत मत हासिल कर एक अहम राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी।
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, '' कांग्रेस ने शुरू में 'इंडिया' गठबंधन के सहयोगी दलों पर अपने दूसरे पंक्ति के नेताओं को ही भेजने का दबाव बनाया। बाद में जब यह आंदोलन अपने दम पर गति पकड़ने लगा तो उसने इसे हथियाने की कोशिश की। अगर कांग्रेस को सचमुच लगता था कि यह आम आदमी पार्टी (आप) का अभियान है, तो फिर वह बाद में इसमें क्यों शामिल हुई?''
भारद्वाज ने कहा, ''कल जंतर-मंतर पर कांग्रेस के सलाहकार योगेंद्र यादव के साथ मेरी कहासुनी हुई थी।''
आप का आरोप है कि कांग्रेस ने आंदोलन के निर्णायक चरण में कॉजपा के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में शामिल होकर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अलग से बातचीत करने की कोशिश की, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
आम आदमी पार्टी के नेताओं के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी की 20 जुलाई को संसद मार्च से एक दिन पहले कांग्रेस ने सोनम वांगचुक को यह संकेत देने के लिए राजी किया कि यदि राजनीतिक दल संसद में यह मुद्दा उठाने का आश्वासन दें, तो वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे।
आप 20 जुलाई को विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन को लेकर भी संदेह जताती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों के आंदोलन पर तब तक चुप रहे, जब तक पुलिस कार्रवाई ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर का विषय नहीं बना दिया।
आप के एक नेता ने कहा, ''20 जुलाई की शाम तक, जब पुलिस ने विद्यार्थियों के साथ कथित तौर पर बर्बरता की, तब तक उन्होंने (राहुल गांधी ने) इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा था।''
बुधवार को जब प्रेसवार्ता में राहुल गांधी से आप के इन आरोपों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस ''विद्यार्थियों के आंदोलन का पूरी तरह समर्थन कर रही है। ''
वह आप पर सीधे कोई टिप्पणी करने से बचते रहे।
भाषा राजकुमार रंजन
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