उच्चतम न्यायालय ने ''हिरासत में मौत'' के मामले में एसआईटी बनाने, प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया
पवनेश
- 23 Jul 2026, 07:56 PM
- Updated: 07:56 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पुलिस हिरासत में जहीरुद्दीन ग्यासुद्दीन शेख नामक व्यक्ति की कथित पिटाई और मौत के मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने यथासंभव तीन महीने के भीतर गुजरात की अदालत के समक्ष अंतिम जांच रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
मृतक के बेटे तौफीक शेख ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने तौफीक की एक याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसके पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि याचिकाकर्ता को संवैधानिक अदालत का रुख करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए।
शुरुआत में, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा कि "पुलिस हिरासत में अप्राकृतिक मौत के मामले में प्रारंभिक जांच जरूरी है। अगर कोई सबूत मिलता है तो प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।"
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू की इस दलील से सहमति नहीं जताई कि प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बजाय पहले प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए।
राजू ने कहा कि इसके अलावा मजिस्ट्रेट जारी है और जिन पांच चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम किया था, उन्हें चोट का कोई निशान नहीं मिला था।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में आरोपियों को बचा रही है और मृतक के बेटे को भी धमकियां दी जा रही हैं।
पीठ ने आदेश दिया, "हम इस बात से संतुष्ट हैं कि फिलहाल किसी भी संदिग्ध का नाम बताए बिना प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी की जांच गुजरात के डीजीपी द्वारा नामित दो अधिकारियों और डीसीपी रैंक के अधिकारियों वाली एसआईटी करेगी।"
वकील वरिंदर कुमार शर्मा के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार, जहीरुद्दीन शेख को 18 मई को वेजलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और कथित तौर पर हिरासत में उनकी पिटाई की गई थी।
याचिका में दावा किया गया कि पुलिसकर्मियों ने जहीरुद्दीन को जबरदस्ती 30 से 40 गोलियां खिला दीं, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश
2307 1956 दिल्ली