कुणाल घोष मामले पर अध्यक्ष की 'शर्मनाक अध्याय' वाली टिप्पणी के खिलाफ टीएमसी का प्रदर्शन
रंजन
- 23 Jul 2026, 07:41 PM
- Updated: 07:41 PM
कोलकाता, 23 जुलाई (भाषा) विधानसभा अध्यक्ष की एक टिप्पणी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष और शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में अध्यक्ष के आसन के करीब जाकर विरोध प्रदर्शन किया।
वे विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस की उस टिप्पणी का विरोध कर रहे थे जिसमें उन्होंने घोष को सदन से बाहर निकाले जाने की घटना को सदन के इतिहास का "शर्मनाक अध्याय" बताया था।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की मांग के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी टिप्पणी वापस लेने से इनकार कर दिया।
भोजनावकाश के बाद, जब चट्टोपाध्याय ने अपनी पार्टी के साथी घोष से जुड़ी बुधवार की घटना का मुद्दा उठाना चाहा, तो विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए इजाजत देने से इनकार कर दिया कि मामला बंद हो चुका है।
इस घटना को "पश्चिम बंगाल विधानसभा के इतिहास में शायद ही कभी हुआ एक शर्मनाक अध्याय" बताते हुए, बोस ने चट्टोपाध्याय से कहा कि वे इस मामले को दोबारा न उठाएं।
टीएमसी के वरिष्ठ विधायक ने हालांकि कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, जिनमें सदस्यों को सदन और संसद से बाहर निकाले जाने के मामले भी शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा "शर्मनाक अध्याय" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए चट्टोपाध्याय ने कहा कि ऐसे कई मौके आए हैं जब विधायकों को सदन से बाहर निकाला गया है।
अपनी बात दोहराते हुए बोस ने कहा कि उन्होंने घोष से कई बार उनकी सीट पर लौटने को कहा था, लेकिन विधायक ने ऐसा करने के बजाय हाथापाई शुरू कर दी।
बाद में घोष सदन में अध्यक्ष के आसन के करीब चले गए और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों के साथ बहस करने लगे; इनमें रितेश तिवारी भी शामिल थे, जो आसन की तरफ आए थे।
चट्टोपाध्याय भी इस झड़प में शामिल थे।
घोष ने अध्यक्ष से "अपमानजनक" शब्द वापस लेने की मांग की, लेकिन बोस ने इनकार करते हुए कहा कि इस घटना पर कोई चर्चा नहीं होगी।
संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने भाजपा विधायकों को शांत कराया, जबकि विरोधी टीएमसी खेमे के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम को घोष से उनकी सीट पर लौटने के लिए कहते हुए देखा गया।
बाद में स्थिति सामान्य हो गई और सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
गृह विभाग के बजट पर बहस के दौरान हंगामे के कारण घोष को बुधवार को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया था।
भाषा प्रशांत रंजन
रंजन
2307 1941 कोलकाता