बिहार:नीट पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा
संतोष
- 23 Jul 2026, 06:03 PM
- Updated: 06:03 PM
पटना, 23 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा और विधान परिषद में बृहस्पतिवार को पटना में एक दिन पहले हुए छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण भारी हंगामा हुआ।
सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई सदस्य बुधवार को छात्रों और पुलिस के बीच हुए हिंसक टकराव के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए अपनी-अपनी सीट पर खड़े हो गए।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कुछ ही मिनट में सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी।
हंगामे के दौरान राजग के कई विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। हंगामे के दौरान भाजपा विधायक श्याम बाबू यादव विपक्षी सदस्यों की ओर बढ़ते हुए दिखाई दिए।
राजग के विधायक यह आरोप लगाते रहे कि बुधवार के प्रदर्शन में "छात्र नहीं, बल्कि गुंडे" शामिल थे। उनका कहना था कि दिनभर चले इस हिंसक संघर्ष में कम से कम 22 पुलिसकर्मी घायल हुए और अंत में मुख्यमंत्री आवास के निकट पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच आमना-सामना हुआ।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के आलोक मेहता के नेतृत्व में विपक्षी विधायकों ने संवाददाताओं से कहा, "भाजपा और उसके सहयोगियों ने जनता के गुस्से से कोई सबक नहीं लिया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गुंडा बताया, जबकि आज सदन में उनका अपना व्यवहार भी गुंडों जैसा था। हमें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।"
भाजपा नेता और मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, "कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसकी झलक बुधवार को पटना में देखने को मिली, जब छात्रों के वेश में असामाजिक तत्वों ने पुलिस से झड़प की, पत्रकारों के साथ अभद्रता की और हमारे दो विधायकों के साथ भी मारपीट की। सरकार उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।"
उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने भाजपा विधायक विनय बिहारी और रोहित पांडेय पर भी हमला किया था।
दोनों विधायक मानसून सत्र में भाग लेने के लिए विधानसभा जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। दोनों विधायकों के सुरक्षित स्थान की ओर भागने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।
आगे किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए विधानसभा परिसर के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए, जिसके कारण दिन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद भी विधायक, पत्रकार और कर्मचारी लंबे समय तक परिसर के भीतर ही रहे।
रामकृपाल यादव ने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि छात्र कार्यकर्ता बनकर घूम रहे एक अपराधी ने एक महिला कांस्टेबल पर चाकू से हमला किया।
उन्होंने आरोप लगाया, "यह सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि खराब करना और अंततः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को अस्थिर करना था।"
हालांकि, जब पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा से महिला कांस्टेबल पर कथित चाकू हमले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हम इस मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"
वहीं, प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने इन आरोपों को खारिज का दिया। सौरभ ने कहा, "भाजपा और उसके सहयोगियों को यह समझना चाहिए कि देश का युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता से आक्रोशित है, जहां नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में कार्रवाई की मांग कर रही छात्राओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।"
उन्होंने कहा, "यह हास्यास्पद है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्तारूढ़ राजग, जिसके नियंत्रण में सभी संस्थान हैं, विपक्ष पर उंगली उठा रहा है। यदि वह हमारी आलोचना करने के बजाय युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करेगा तो उसे और अधिक जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा।"
इस बीच, विधान परिषद में भी इसी मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ। राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी द्वारा लाया गया स्थगन प्रस्ताव सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद विपक्ष के कई सदस्य आसन के समीप पहुंच गए।
हंगामे के कारण सभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न 2:30 बजे तक स्थगित कर दी।
बाद में जद(यू) के वरिष्ठ नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, "बुधवार को हुई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी। उन्हें विपक्षी दलों ने उकसाया था। हमें जानकारी मिली है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कील लगे डंडों से भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया।"
कांग्रेस के सहयोगी दल राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा, "सत्तारूढ़ गठबंधन इस तथ्य से आंखें मूंद रहा है कि आज का माहौल 1974 जैसा है, जब युवा जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एकजुट हुए थे और उसी जनआंदोलन ने कुछ वर्षों बाद सरकार के पतन की नींव रखी थी।"
भाषा कैलाश
संतोष
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