गंगा के निकट अवैध निर्माण चिंता का विषय, छह सप्ताह में हटाए जाएं सभी ढांचे: न्यायालय
नरेश
- 23 Jul 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध निर्माणों को गंभीर चिंता का विषय मानते हुए बिहार सरकार को पटना में नदी के किनारे नौजर घाट से नूरपुर घाट तक सभी अवैध ढांचों व अतिक्रमणों को छह सप्ताह के अंदर हटाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों के बावजूद अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
पीठ ने कहा, "हमें बताया गया है कि अब तक अतिक्रमण हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। हम यह सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार को छह सप्ताह का समय देते हैं कि पटना में नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच सभी अवैध ढांचे, निर्माण और अतिक्रमण हटा दिए गए हैं।"
पीठ ने सक्षम प्राधिकारी को इस संबंध में सुनवाई की अगली तारीख तक हलफनामे के रूप में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अवैध निर्माणों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करने के लिए और समय मांगा। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
इस पर उच्चतम न्यायालय ने कहा, "सभी राज्यों को केंद्र सरकार को आवश्यक जानकारी देने का अंतिम अवसर दिया जाता है। अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो अदालत को उन राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"
उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश उस समय दिया जब याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने पटना में गंगा नदी के किनारे और नदी क्षेत्र में सैकड़ों अतिक्रमणों का मुद्दा उठाया।
वशिष्ठ ने कहा कि ऐसी स्थिति होने के बावजूद राज्य के अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और उन्हें कम से कम इस मामले को देखना चाहिए।
अदालत पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 30 जून 2020 के आदेश को चुनौती दी थी।
एनजीटी ने पर्यावरण की दृष्टि से गंगा के संवेदनशील डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ सिन्हा की याचिका खारिज कर दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि एनजीटी ने बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले लोगों और अवैध निर्माणों की विस्तृत जानकारी की जांच किए बिना ही आदेश पारित कर दिया था।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश
2307 1743 दिल्ली