संसद में चौथे दिन भी गतिरोध कायम, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा
मनीषा
- 23 Jul 2026, 05:41 PM
- Updated: 05:41 PM
( तस्वीरों सहित )
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बृहस्पतिवार को भी संसद के दोनों सदनों में गतिरोध कायम रहा और लोकसभा जहां दो बार के वहीं राज्यसभा तीन बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में चर्चा के लिए पूर्व शर्त लगाकर इससे भाग रहा है। उसने कहा कि सरकार तत्काल चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को बिना देरी के चर्चा शुरू करनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि विपक्ष से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि वह चर्चा में भाग ले।
लोकसभा की बैठक शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर सोमवार को राजधानी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनसे प्रश्नकाल चलने देने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद वह सदस्यों को उनकी बात रखने का अवसर देंगे। लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा और बिरला ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
एक बार के स्थगन के बाद बैठक 12 बजे शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा, ''हमने कल भी अपील की थी और आज फिर से सदन से अपील कर रहे हैं कि नीट पेपर लीक मामले में चर्चा बिना विलंब के शुरू होनी चाहिए।''
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा तत्काल शुरू होनी चाहिए और विपक्ष जब यह चर्चा चाहे, जिस तारीख को चाहे और जितनी लंबी चर्चा करना चाहे, सरकार इसके लिए तैयार है।
रीजीजू ने कहा, ''हम विपक्ष से हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहते हैं कि आप तय कीजिए कब चर्चा करना चाहते हैं। लेकिन आप शर्त लगाकर बहाना बनाते हैं तो इसका मतलब है आप चर्चा से भाग जाना चाहते हैं। आज राजग के सभी साथियों ने भी मांग की है कि नीट पेपर लीक पर तुरंत चर्चा हो। जितने भी राज्यों में पेपर लीक हुए हैं, सब पर चर्चा होना आवश्यक है।''
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह देश के सामने अच्छा संदेश दिया है कि नीट पेपर लीक मामले के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालत बनाने का आदेश दिया गया है और देश के युवाओं, छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने आसन के समीप हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से कहा कि सरकार चर्चा चाहती है और सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। हंगामा थमते नहीं देख उन्होंने करीब 10 मिनट बाद बैठक दो बजे तक स्थगित कर दी।
दो बजे बैठक फिर शुरू हुई तो पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने विपक्ष से नियम 377 के तहत सदस्यों को उनके मुद्दे उठाने देने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।
सैकिया ने करीब तीन मिनट बाद ही कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
उधर राज्यसभा में भी समान स्थिति रही और विपक्ष नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा।
पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री रीजीजू ने कहा कि सरकार आज ही नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को बहस के लिए कोई शर्त नहीं रखनी चाहिए।
इस पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर चर्चा शुरू होने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। सत्ता पक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताया।
दोनों पक्षों की नारेबाजी के बीच सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
दोपहर 12 बजे बैठक दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पुलिस के कथित लाठीचार्ज के कारण कई छात्र अस्पताल में भर्ती हैं और उनके अभिभावक बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा, ''जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक चर्चा शुरू नहीं होगी।''
इस पर सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने विपक्ष के रवैये को ''बेहद गैर-जिम्मेदाराना'' करार दिया। उन्होंने कहा, ''विपक्ष न तो चर्चा चाहता है और न ही सदन चलने देना चाहता है। पहले उन्होंने प्रश्नपत्र लीक पर चर्चा की मांग की और सरकार ने कहा कि हम नीट तथा उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे।''
हंगामे के कारण बैठक दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
दो बजे बैठक शुरू होने पर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया और सदन में हंगामा जारी रहा।
उपसभापति हरिवंश ने कहा, ''आज चौथा दिन है। कम से कम विधेयक पर तो चर्चा होने दीजिए... सदन चलने दीजिए।'' लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बजे सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने विपक्ष के नेता खरगे को बोलने की अनुमति दी।
खरगे ने लिखित पाठ से काव्यात्मक पंक्तियां पढ़ना शुरू करते हुए कहा कि विपक्ष देशहित में हर चुनौती का सामना करेगा।
उपसभापति ने उन्हें आगे बोलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को केवल गतिरोध समाप्त करने और चर्चा शुरू कराने के उद्देश्य से बोलने का अवसर दिया गया था, जिसके लिए सरकार पहले ही सहमति जता चुकी है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल विरोध प्रदर्शन करना चाहता है। इसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।
संसद का मानसून सत्र सोमवार को शुरू हुआ और दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार हंगामे के कारण बाधित रही है। हंगामे के कारण दोनों सदनों में अब तक एक दिन भी शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाया है।
लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी। तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा आदि भी इस बैठक में उपस्थित थे।
इस बीच विपक्ष और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों ने संसद परिसर के बाहर एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।
संसद के मकर द्वार के बाहर दोनों पक्षों के सांसद बड़ी संख्या में एकत्र हुए और एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए।
भाषा अविनाश मनीषा
मनीषा
2307 1741 संसद