अदालत ने अमेरिकी एजेंसियों को फर्जी ईमेल भेजने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
पवनेश
- 23 Jul 2026, 05:24 PM
- Updated: 05:24 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने उस व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर अमेरिका की संघीय एजेंसियों को अपने करीबी रिश्तेदार के नाम पर फर्जी ईमेल भेजने का आरोप है।
अदालत ने कहा कि आरोप एक गंभीर साइबर अपराध की ओर इशारा करते हैं, जिसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं और मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने माइकल आशीष मुखर्जी की याचिका खारिज कर दी।
न्यायाधीश ने कहा कि उसके खिलाफ लगे आरोप केवल वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक ''बेहद जटिल'' साइबर अपराध को उजागर करते हैं।
मुखर्जी पर आरोप है कि उसने अपने करीबी रिश्तेदार की पहचान का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका की एजेंसियों को फर्जी ईमेल भेजे और यह झूठ बोला कि उसने अमेरिकी राजनीतिक कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या की है।
मुखर्जी के खिलाफ यहां सफदरजंग एन्क्लेव थाने में बीएनएस की कई धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत ने 22 जुलाई को दिए आदेश में कहा, ''फर्जी कबूलनामे भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए विशेष डिजिटल उपकरणों की बरामदगी के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ बेहद आवश्यक है। आरोपी को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत देने से व्यावहारिक रूप से इन डिजिटल साक्ष्यों के नष्ट होने की आशंका है।''
अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता प्रतीक पॉल ने आरोप लगाया कि मुखर्जी ने उनके नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाई और इन फर्जी ईमेल को एफबीआई, अमेरिकी न्याय विभाग और गृह सुरक्षा विभाग समेत कई एजेंसियों को भेजा। इन ईमेल में उसने चार्ली किर्क की हत्या की जिम्मेदारी ली थी।
पॉल कोलंबिया विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी हैं।
आरोप है कि इन ईमेल में पॉल के पासपोर्ट, वीजा और न्यूयॉर्क आईडी से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इसके बाद अमेरिकी अधिकारी न्यूयॉर्क स्थित उनके आवास पर गये।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि ये कृत्य मुखर्जी और पॉल की बहन के बीच जारी वैवाहिक विवाद की पृष्ठभूमि में किए गए थे।
इसने यह भी आरोप लगाया कि मुखर्जी ने अपनी पत्नी के खिलाफ कतर के आव्रजन अधिकारियों के समक्ष और अपनी सास के खिलाफ आयकर विभाग में झूठी शिकायतें दर्ज कराईं।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि आरोप केवल वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक ''बेहद जटिल'' साइबर अपराध को उजागर करते हैं।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
2307 1724 दिल्ली