तमिलनाडु सरकार ने द्रमुक की नाश्ता योजना का नाम बदल 'पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना' किया
पवनेश
- 23 Jul 2026, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
चेन्नई, 23 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने पूर्ववर्ती द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार की 'मुख्यमंत्री नाश्ता योजना' का नाम बदलकर दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के सम्मान में 'पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना' कर दिया है।
राज्य के शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने वाले नेता के रूप में याद किए जाने वाले कामराज ने गरीबी से निपटने और विद्यालयों में बच्चों का पंजीकरण बढ़ाने के उद्देश्य से 1956 में स्कूली बच्चों के लिए 'मध्याह्न भोजन योजना' की शुरुआत की थी। बाद में, पूर्व मुख्यमंत्री एम. जी. रामचंद्रन ने 1982 में इस योजना का नाम बदलकर पुराची थलाइवर एमजीआर पोषण आहार कार्यक्रम कर दिया था।
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत एम. करुणानिधि और जे. जयललिता ने इस योजना के पोषण संबंधी पहलुओं में और सुधार किए। इसके बाद, एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली तत्कालीन द्रमुक सरकार ने 2022 में कामराज की जयंती के अवसर पर 15 जुलाई को कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के लिए अपनी प्रमुख 'मुख्यमंत्री नाश्ता योजना' शुरू की थी।
स्कूली बच्चों की समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने वाले कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री को सम्मान देने और उनके योगदान को फिर से रेखांकित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने 15 जुलाई को एक आदेश जारी किया। इसके तहत योजना का नाम बदलकर 'पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना' कर दिया गया है।
इसके साथ ही सरकार ने इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए राज्य भर के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के छात्रों को भी इसके दायरे में शामिल करने की घोषणा की है।
इस विस्तार के तहत माध्यमिक विद्यालयों के करीब 15.14 लाख छात्र लाभान्वित होंगे, जिससे राज्य में योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 35 लाख हो जाएगी।
द्रमुक के वरिष्ठ नेता दुरईमुरुगन ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह योजना मूल रूप से किसी विशेष नेता के नाम पर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की एक सामान्य पहल के रूप में शुरू की गई थी।
दुरईमुरुगन ने कहा, "कामराज के नाम पर इसका नाम रखने में कुछ भी गलत नहीं है। इस योजना का संबंध विजय या किसी अन्य मुख्यमंत्री से नहीं है। लेकिन मौजूदा सरकार का पहले से चल रही योजनाओं के नाम बदलना इस बात का संकेत है कि वह नई और अभिनव परियोजनाएं शुरू करने में असमर्थ हैं।"
भाषा
प्रचेता पवनेश
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