जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों के हमले में निरीक्षक घायल: दिल्ली पुलिस
सुरेश
- 23 Jul 2026, 04:12 PM
- Updated: 04:12 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि ड्यूटी पर जा रहे एक निरीक्षक पर जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कथित तौर पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गए।
निरीक्षक नंद किशोर सिंह ने बताया कि उन्होंने बुधवार रात हनुमान मंदिर के पास अपना वाहन खड़ा किया था और जंतर-मंतर स्थित अपने ड्यूटी स्थल की ओर पैदल जा रहे थे, तभी उन्हें संसद मार्ग चौराहे के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र दिखाई दिए।
सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''वहां करीब चार से पांच हजार लोग जमा थे। वे पुलिस और सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मुझे लगा कि वे विद्यार्थी हैं और मैं अपनी ड्यूटी करने जा रहा था।''
सिंह के अनुसार, जब उन्होंने वहां से निकलने की कोशिश की तो करीब 100 से 150 लोगों ने उन्हें कथित तौर पर घेर लिया और उन पर हमला कर दिया।
सिंह ने कहा, ''उन्होंने मुझपर लाठियों, डंडों, पत्थरों और अपने हाथों में मौजूद नुकीली वस्तुओं से हमला किया। मुझे चोटें आईं और मैं किसी तरह वहां से बचकर निकला। जब मुझ पर हमला किया गया, उस समय मैं वर्दी में था।''
जंतर-मंतर क्षेत्र में विद्यार्थियों के जारी प्रदर्शन के दौरान यह घटना हुई। इस क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं।
पुलिस ने आरोप लगाया कि हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उसने कहा कि हमलों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।
दिल्ली पुलिस ने भी वीडियो साझा किया जिसमें प्रदर्शनकारी एक निरीक्षक की पिटाई करते दिख रहे हैं, जबकि वह पुलिस अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। वीडियो के अनुसार, अधिकारी को 150 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने घेर रखा था।
दिल्ली पुलिस ने अपने 'एक्स' हैंडल पर एक संदेश साझा किया और प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
संदेश में लिखा है, "वर्दी पहन लेने से किसी इंसान का दर्द कम नहीं हो जाता। हर बैज के पीछे धड़कता हुआ दिल, एक परिवार और सेवा का संकल्प होता है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटना बेहद चिंताजनक है। असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।"
भाषा नोमान नोमान सुरेश
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