संस्कृति केंद्र का बेशकीमती संग्रह अब हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय में
सिम्मी
- 23 Jul 2026, 09:21 AM
- Updated: 09:21 AM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) सौंदर्यपूर्ण नक्काशी वाले खिलौनों और आभूषण रखने के बक्सों से लेकर आकर्षक डिजाइन वाले पानदानों तक, कभी दिल्ली के संस्कृति केंद्र की शोभा बढ़ाने वाली करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह अब यहां स्थित हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की एक समर्पित दीर्घा का हिस्सा बन गया है।
इस नयी दीर्घा का उद्घाटन बुधवार शाम हुमायूं के मकबरा परिसर स्थित संग्रहालय में आयोजित एक समारोह में किया गया। यह परिसर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
दक्षिण दिल्ली के महरौली-गुरुग्राम रोड स्थित आनंदग्राम में स्थापित संस्कृति केंद्र की स्थापना 97 वर्षीय ओ. पी. जैन ने दशकों में एकत्र किए गए अपने निजी संग्रह के आधार पर की थी। इस केंद्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर विभिन्न प्रकार के वस्त्रों तक, विविध विषयों पर आधारित संग्रहालय स्थापित किए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि 2023 में इसके न्यास मंडल ने कुछ चुनिंदा वस्तुओं और स्थापनाओं को छोड़कर इस अमूल्य संग्रह को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के माध्यम से राष्ट्र को ''उपहार'' स्वरूप सौंप दिया।
करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं के इस संग्रह को अब संस्कृति केंद्र से स्थानांतरित कर हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की नयी दीर्घा में प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रह में 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और अविभाजित भारत की उत्कृष्ट डिजाइन वाली साड़ियां शामिल हैं।
इस विशेष दीर्घा को 'संस्कृति संग्रहालय : दैनिक जीवन की कला और भारतीय वस्त्र' के रूप में विकसित किया गया है। इसे 'आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर' (एकेटीसी) ने आईजीएनसीए के सहयोग से स्थापित किया है।
उद्घाटन समारोह में ओ. पी. जैन भी उपस्थित रहे। हालांकि अधिक आयु के कारण उनका संबोधन एकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रतिश नंदा ने पढ़कर सुनाया।
संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और वक्ष-कवच स्थापित किया गया है। भीतर प्रदर्शित संग्रह को विभिन्न विषयों में विभाजित किया गया है, जिनमें खिलौने, लोटे, दीपक, महिलाओं के श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं (जैसे बैग, आभूषण रखने के बक्से आदि), पानदान और विभिन्न प्रकार के वस्त्र शामिल हैं।
वस्त्रों के संग्रह में 19वीं और 20वीं सदी की साड़ियां, ढाका (तत्कालीन अविभाजित भारत) की जामदानी साड़ी तथा पंजाब की फुलकारी और गुजरात क्षेत्र के पाटन पटोला जैसी दुर्लभ बुनाई शैलियों के उत्कृष्ट नमूने शामिल हैं।
अपने लिखित संबोधन में जैन ने कहा, ''लगभग 50 वर्ष पहले जब संस्कृति फाउंडेशन की स्थापना हुई थी, तब इसके पीछे यह विश्वास था कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल प्रशंसा करने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल, अध्ययन और उसे साझा किया जाना चाहिए।''
एकेटीसी ने बताया कि 'संस्कृति' दीर्घा एक अगस्त से आम जनता के लिए सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक खुली रहेगी। प्रवेश टिकट 50 रुपये का होगा और प्रति घंटे केवल 50 आगंतुकों को प्रवेश दिया जाएगा।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी
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