पूर्वी असम में 60 साल में पहली बार ऐसी बाढ़ आई; सरकार राहत कार्यों में जुटी: मंत्री पीयूष हजारिका
पवनेश
- 22 Jul 2026, 04:34 PM
- Updated: 04:34 PM
(तस्वीरों के साथ)
गुवाहाटी, 22 जुलाई (भाषा) असम का प्रशासनिक तंत्र राज्य के पूर्वी इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि ये क्षेत्र पिछले 60 साल से अधिक समय में पहली बार इतनी भीषण बाढ़ का सामना कर रहे हैं। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने बुधवार को विधानसभा में यह बात कही।
बाढ़ की स्थिति पर सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान हजारिका ने कहा कि सरकार राहत एवं बचाव कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा, "तीन दिन पहले नगालैंड में बादल फटने की घटना के बाद वहां से पानी का तेज बहाव हुआ और शिवसागर, चराइदेव तथा जोरहाट के वे इलाके भी जलमग्न हो गए, जहां पहले कभी ऐसी बाढ़ नहीं आई थी। यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति है।"
हजारिका ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने राज्य में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस स्थिति का अंदाजा नहीं था, क्योंकि राज्य के पूर्वी हिस्से के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में छह दशक से ज्यादा समय में ऐसी बाढ़ नहीं देखी गई है।
हजारिका ने कहा, "जल संसाधन विभाग के तीन-चार तटबंध टूट गए हैं, जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में अधिकांश अन्य तटबंधों के तीन-चार मीटर ऊपर तक पानी बह रहा है।"
उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति के लिए कोई तैयार नहीं था, क्योंकि पिछले 60 वर्षों से अधिक समय में ऐसे हालात कभी नहीं पैदा हुए थे।"
मंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्य मेघालय में एक दशक से अधिक समय पहले बादल फटने की घटना के बाद असम के ग्वालपाड़ा में भी इसी तरह की तबाही देखने को मिली थी।
उन्होंने कहा कि सरकार फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
हजारिका ने कहा कि मुख्यमंत्री सर्वाधिक प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जबकि बाढ़ से जूझ रहे जिलों के प्रभारी मंत्री, स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय के लिए पहले से ही मौके पर मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, "अभी भी कई लोग लापता हैं और ऐसी स्थिति में राजनीति नहीं की जानी चाहिए।"
असम में इस साल बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 जिलों के करीब 5.65 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ की स्थिति पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने प्रश्नकाल के बाद स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की थी।
विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने कहा कि उन्होंने मौजूदा हालात को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि लोगों को पेड़ों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है और कई घर बाढ़ के पानी में पूरी तरह से डूब गए हैं।
चौधरी ने बताया कि इस पत्र के बाद पार्टी ने दास से स्थगन प्रस्ताव लाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्होंने इसकी अनुमति नहीं दी।
दास ने कहा कि बाढ़ की स्थिति बेहद चिंताजनक है, लेकिन जब सदन में अतिरिक्त मांगों पर मतदान निर्धारित हो, तब कार्यवाही स्थगित नहीं की जा सकती।
हजारिका ने दास से कांग्रेस विधायकों को संक्षेप में अपनी बात रखने की अनुमति देने का आग्रह किया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी मंजूरी दे दी।
कांग्रेस विधायक दल के उपनेता जॉय प्रकाश दास ने सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान के बारे में जानकारी मांगी।
उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए कांग्रेस ने विधानसभा की बैठक दो दिन के लिए स्थगित करने की मांग की थी।
जॉय प्रकाश ने कहा कि विधानसभा की एक समिति को प्रभावित इलाकों का दौरा करके राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लेना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को हालात की प्रत्यक्ष जानकारी लेने के लिए प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए।
कांग्रेस के एक अन्य विधायक जाकिर हुसैन सिकदर ने कहा कि संकट की इस घड़ी में कोई भी सरकार के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के मुद्दे पर सदन में विस्तार से चर्चा किए जाने की जरूरत है।
भाषा पारुल पवनेश
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