सरकार ने तृणमूल के ''गद्दारों'' को मान्यता देने के लिए ताकत झोंकी: महुआ
नेत्रपाल
- 19 Jul 2026, 04:03 PM
- Updated: 04:03 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने रविवार को सर्वदलीय बैठक में पार्टी के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इन सांसदों की स्थिति पर अंतिम फैसला नहीं किया है, इसके बावजूद सरकार ने उन्हें ''मान्यता देने'' के लिए अपनी ओर से पूरी ताकत लगा दी है।
मोइत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 20 ''गद्दार'' सांसदों को अयोग्य घोषित नहीं करते हैं तो उनकी पार्टी अदालत का रुख कर सकती है।
उन्होंने यहां सर्वदलीय बैठक से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से कहा, ''आज तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में सभी विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री के उस फैसले के विरोध में बैठक से बहिर्गमन किया, जिसमें एनसीपीआई को आमंत्रित किया गया। एनसीपीआई 20 टीएमसी गद्दारों की एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है।''
तृणमूल सांसद का कहना था, ''अध्यक्ष ने किसी विलय को मंजूरी नहीं दी है। तृणमूल ने अयोग्यता की 20 याचिकाएं दायर की हैं, जो अभी लंबित हैं। उन पर अभी फैसला नहीं हुआ है।''
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद उसके 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए।
बागी तृणमूल सांसदों सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार के सर्वदलीय बैठक में शामिल होने पर विपक्षी दलों ने विरोध जताया और सांकेतिक रूप से विरोध जताते हुए कुछ देर के लिए बैठक से बाहर चले गए। विपक्षी सदस्य बाद में बैठक में भाग लेने के लिए लौट आए।
मोइत्रा ने कहा कि तृणमूल की ताकत ''अब भी 28 सांसदों की है'' और अगर ऐसा है तो बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में किस आधार पर आमंत्रित किया गया।
उन्होंने कहा, ''अध्यक्ष ने न तो विलय को मंजूरी दी है और न ही हमारी अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला किया है। फिर संसदीय कार्य मंत्री उन्हें कैसे आमंत्रित कर सकते हैं और उन्हें मान्यता देने का फैसला कैसे कर सकते हैं। उन्होंने अध्यक्ष के कार्यालय से बाहर जाकर अपने स्तर पर यह किया है।''
तृणमूल सांसद ने कहा कि फिलहाल उनकी पार्टी बागी सांसदों की अयोग्यता पर फैसले का इंतजार कर रही है।
उधर, एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा करने वाले सांसदों के समूह के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने बैठक में बुलाए जाने को उचित बताया और कहा कि अब एनसीपीआई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का दूसरा सबसे बड़ा घटक है।
उन्होंने कहा, ''आज एनसीपीआई राजग में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। यह चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की पार्टियों से भी बड़ी है। हमने मांग की है कि एनसीपीआई को निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता दी जाए। वह पत्र लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखा जाना है और वह दस्तावेज यहां मौजूद है। काकोली इसे जमा करने जा रही हैं।''
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1907 1603 दिल्ली