अस्पतालों के अंदर राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी : केरल के स्वास्थ्य मंत्री
देवेंद्र
- 19 Jul 2026, 05:47 PM
- Updated: 05:47 PM
पथानमथिट्टा (केरल), 19 जुलाई (भाषा) केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार को सरकारी अस्पतालों के भीतर राजनीतिक संगठनों द्वारा मुफ्त भोजन वितरण के खिलाफ अपना रुख और सख्त करते हुए कहा कि अस्पताल परिसरों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मंत्री ने कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार की नीति यह सुनिश्चित करने की है कि मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए मुफ्त भोजन केवल सरकारी अस्पतालों में स्थापित की जाने वाली सामुदायिक रसोई के माध्यम से ही वितरित किया जाए।
मुरलीधरन ने यहां पत्रकारों से कहा, ''अस्पतालों के भीतर अधिकार क्षेत्र स्वास्थ्य विभाग का है, किसी भी राजनीतिक संगठन का नहीं। यदि वे भोजन वितरित करना चाहते हैं तो अस्पताल परिसर के बाहर कर सकते हैं, लेकिन अस्पताल के अंदर इसकी जिम्मेदारी सरकार की है।''
उन्होंने कहा कि यूडीएफ सरकार किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को किसी भी परिस्थिति में अस्पताल परिसर के भीतर गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देगी।
मंत्री ने कहा, ''पार्टी के बैनर या झंडे लगाकर भोजन का वितरण नहीं होना चाहिए। यह गलत है और सरकार इसकी अनुमति नहीं देगी। यदि संगठन सहायता करना चाहते हैं, तो वे सामुदायिक रसोई में योगदान दे सकते हैं।''
मुरलीधरन ने बताया कि सामुदायिक रसोई योजना की शुरुआत पहले अलप्पुझा में की जाएगी और उसके बाद स्वयंसेवी संगठनों से विचार-विमर्श के पश्चात इसे राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों तक विस्तारित किया जाएगा।
शनिवार को मुरलीधरन ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार मरीजों और उनके साथ आने वाले तीमारदारों के लिए मुफ्त भोजन वितरण की व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में सामुदायिक रसोई स्थापित करेगी।
इस बीच, विपक्षी दलों माकपा और भाजपा ने मंत्री की टिप्पणियों की आलोचना की।
माकपा के विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास ने मंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर अपना ''अहंकार'' छोड़ें और आम सहमति बनाने के लिए डीवाईएफआई समेत युवा संगठनों के साथ बातचीत करें।
उन्होंने कहा कि सभी नियमों का पालन करते हुए लोगों को भोजन उपलब्ध कराना एक मानवीय पहल है और सवाल उठाया कि इसे दुश्मनी की नजर से क्यों देखा जा रहा है।
माकपा के राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी संवेदनशील व्यक्ति मुफ़्त भोजन बांटने का विरोध नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि माकपा की युवा इकाई 'डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया' (डीवाईएफआई) इस पहल को जारी रखेगी।
भाजपा ने भी मंत्री के रुख की आलोचना की और प्रस्तावित सामुदायिक रसोई पहल की घोषणा पर संदेह जताया।
प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने सवाल उठाया कि सरकार स्वयंसेवी और युवा संगठनों को सरकारी अस्पतालों में खाने के पैकेट बांटने से क्यों रोक रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग को इस मुद्दे पर अपना ''अहंकार'' छोड़ देना चाहिए।
भाषा शफीक देवेंद्र
देवेंद्र
1907 1747 पथनमथिट्टा