विपक्षी दलों ने वांगचुक के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की, असहमति की आवाज को दबाने का आरोप लगाया
नेत्रपाल
- 18 Jul 2026, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को ''जबरन हटाए'' जाने की शनिवार को निंदा की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने, असहमति की आवाज को दबाने और वार्ता के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक को शनिवार को उनके अनशन के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर थे, तब उन्हें जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के मूल सिद्धांत ''असत्य और हिंसा'' हैं।
गांधी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के मूल सिद्धांत ''असत्य और हिंसा'' हैं।
उन्होंने कहा, ''जब सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर थे, तब उन्हें जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत है।''
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और विद्यार्थियों की आत्महत्याएं भारत के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''111 दिन तक मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो जी.डी. अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलंपिक पहलवान हों, हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फिर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन, इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख्शा।''
उन्होंने कहा, ''इनकी नजर में कोई भी अगर आवाज उठाता है तो वह राष्ट्र विरोधी है, परजीवी है। जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।''
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर ''दमनकारी राजनीति'' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाया है।
यादव ने 'एक्स' पर कहा, ''भाजपा ने कभी भी गांधी में विश्वास नहीं किया और न ही उनके गांधीवादी तरीकों में। भाजपा की नकारात्मक विचारधारा संघर्ष की है, न कि संवाद की। भाजपा निराशा का पर्याय बन गई है।''
अखिलेश यादव की पत्नी एवं लोकसभा सदस्य डिंपल यादव ने बृहस्पतिवार को जंतर-मंतर पर वांगचुक से मुलाकात की थी।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'एक्स' पर कहा कि जो सरकार असहमति को लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के बजाय खतरा मानती है, उससे जवाबदेही की उम्मीद नहीं की जा सकती।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारी के स्वास्थ्य से अधिक अपनी छवि को प्राथमिकता दे रही है।
झा ने कहा, ''उन्हें (वांगचुक) जबरन हटा दिया गया। उन्हें उनके स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। सरकार को केवल अपनी छवि की चिंता है। इस सरकार में संवेदनशीलता का जरा भी अंश नहीं बचा है।''
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के अध्यक्ष शरद पवार ने वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए इसे ''गैर-जिम्मेदाराना'' बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों पर ध्यान देने के बजाय मूकदर्शक बनी रही।
उन्होंने कहा कि यह मांग वास्तविक थी और छात्रों के हित में थी, लेकिन दिल्ली में मौजूद होने के बावजूद सरकार का कोई भी नेता प्रदर्शन स्थल पर नहीं गया।
पवार ने कहा कि वांगचुक पर कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा।
शिवसेना (उबाठा) के नेता आदित्य ठाकरे ने वांगचुक को हटाए जाने की आलोचना की। ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''यह बेहद शर्मनाक है। पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र का किस तरह बेशर्मी से गला घोंटा जा रहा है।''
उन्होंने लिखा, ''एक अयोग्य मंत्री के खिलाफ विद्यार्थियों के समर्थन से शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन भी अब नहीं होने दिया जा रहा।''
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ''लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने'' तथा जवाबदेही को कमजोर करने का प्रयास है।
करात ने कहा, ''आज सुबह सोनम वांगचुक के साथ जो हुआ, वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने की कार्रवाई है; यह तानाशाही का संकेत है।''
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे ने इसे ''भारतीय राजनीति के सबसे काले दिनों में से एक'' बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ''हमारी आंखों के सामने दम तोड़ रहा है''।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने कहा, ''यह हमारे देश के लिए चिंताजनक स्थिति है। अगर उनसे बातचीत करने का प्रयास किया गया होता, तो वह (वांगचुक) अपना अनशन समाप्त कर देते।''
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
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