दिल्ली में अभिभावक संगठन की निजी विद्यालयों के ऑडिट, फीस विनियमन समितियों के गठन की मांग
माधव
- 18 Jul 2026, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) नवगठित पेरेंट्स एसोसिएशन फॉर वेलफेयर एंड जस्टिस (पीएडब्ल्यूजे) ने निजी विद्यालयों की फीस निर्धारण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग करते हुए शनिवार को निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों के स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट तथा स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समितियों (एसएलएफआरसी) के तत्काल गठन की मांग की।
संघ ने सरकार से सभी विद्यालयों में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठित करने और फीस संबंधी विवादों के कारण बच्चों के उत्पीड़न से उनकी सुरक्षा के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का भी आग्रह किया। इसके अलावा, उसने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने की मांग की।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संगठन के उद्घाटन समारोह में पीएडब्ल्यूजे अध्यक्ष दिव्या मैते ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अभिभावक भी समान भागीदार हैं और स्कूल प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा बाल-केंद्रित बनाने में उनकी बड़ी भूमिका होनी चाहिए।
संघ ने कहा कि बच्चों के कल्याण, सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अभिभावकों, विद्यालयों, नीति-निर्माताओं और नागरिक समाज के बीच सहयोग का मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस संगठन का गठन किया गया है।
अभिभावक संगठन ने भारत के प्रधान न्यायाधीश और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से निजी विद्यालयों की फीस विनियमन से जुड़े 22 मई के फैसले से उत्पन्न मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेने पर विचार करने की अपील की।
पीएडब्ल्यूजे ने कहा कि इस फैसले से दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से भूमि प्राप्त विद्यालयों द्वारा फीस बढ़ाने के लिए पूर्व स्वीकृति संबंधी उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के पहले के फैसलों की व्याख्या पर सवाल खड़े हुए हैं।
पीएडब्ल्यूजे ने बताया कि डीपीएस सोसाइटी ने संगठन की शुरुआत से पहले उसकी अध्यक्ष दिव्या मैते, सचिव चंदन कुमार और उपाध्यक्ष सौरभ अग्रवाल को कानूनी नोटिस भेजे। नोटिस में डीपीएस विद्यालयों की स्वामित्व वाली बौद्धिक संपदा के कथित अनधिकृत उपयोग का आरोप लगाया गया है।
हालांकि, संगठन ने इन आरोपों से असहमति जताते हुए कहा कि वह उचित कानूनी माध्यम से इसका जवाब देगा और अपने उद्देश्यों को संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक तरीकों से आगे बढ़ाता रहेगा।
भाषा अमित माधव
माधव
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