एफसीएनआर जमा के जरिये एनआरआई भारत में ला सकते हैं 70-80 अरब डॉलर: विशेषज्ञ
वैभव
- 17 Jul 2026, 11:24 AM
- Updated: 11:24 AM
(गुरदीप सिंह)
सिंगापुर, 17 जुलाई (भाषा) अनिवासी भारतीय (एनआरआई) मौजूदा एफसीएनआर पहल के तहत भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। इसके तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। सिंगापुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने शुक्रवार को यह बात कही।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की सिंगापुर शाखा द्वारा बुधवार को आईसीएआई की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति और उसकी 25 विदेशी शाखाओं के सहयोग से आयोजित वैश्विक वेबिनार में भी इस पर चर्चा की गई।
विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी विदेश में अर्जित आय को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर प्रतिफल प्राप्त कर सकते हैं। यह पारंपरिक सावधि जमा की तरह काम करता है, लेकिन इसमें राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही रहती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपये को समर्थन देने की रणनीति के तहत सीमित अवधि के लिए बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है।
आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''30 सितंबर, 2026 तक खुली इस एफसीएनआर पहल के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं।''
वेबिनार में विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों से सहमति जताते हुए गट्टानी ने कहा कि इस पहल के तहत एनआरआई भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं।
उन्होंने कहा, '' इस तरह की आमद से भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी और साथ ही एनआरआई को देश के विकास में सीधे योगदान देने का अवसर भी मिलेगा।''
यहां 15 जुलाई को आयोजित इस वेबिनार में दुनियाभर से करीब 1,800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, एनआरआई, मान्यता प्राप्त निवेशक, कारोबारी नेता, फैमिली ऑफिस और वित्त क्षेत्र के पेशेवर शामिल थे।
वेबिनार का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को हाल में घोषित एफसीएनआर अवसर और निवेशकों तथा भारतीय अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए इसके संभावित लाभों से परिचित कराना था।
एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एफसीएनआर ढांचे, निवेश प्रक्रिया, नियामकीय आवश्यकताओं, कराधान संबंधी पहलुओं और एनआरआई के लिए उपलब्ध लाभों की जानकारी दी।
आईसीएआई सिंगापुर शाखा के वाइस चेयरमैन कुशल जाजू ने कहा कि संवाद सत्र में निवेशकों के अनेक सवालों के जवाब दिए गए, जिससे प्रतिभागियों को योजना के तहत निवेश के व्यावहारिक पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
भाषा निहारिका वैभव
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