केरल में 'रामायण मासम' की शुरुआत, नेताओं ने लोगों को दी शुभकामनाएं
प्रशांत
- 17 Jul 2026, 11:03 AM
- Updated: 11:03 AM
तिरुवनंतपुरम, 17 जुलाई (भाषा) केरल में शुक्रवार को मलयालम माह 'कर्किडकम' के साथ ही 'रामायण मासम' की शुरुआत हो गयी। इस अवसर पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन समेत कई नेताओं ने लोगों को शुभकामनाएं दीं।
भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन के महीने के रूप में मनाए जाने वाले रामायण मासम के दौरान राज्यभर में घरों और मंदिरों में प्रतिदिन 'अध्यात्म रामायण' का पाठ किया जाता है। यह महीना पारंपरिक रूप से आयुर्वेदिक कायाकल्प उपचारों के लिए भी जाना जाता है।
राज्यपाल आर्लेकर ने कहा कि रामायण मासम का पालन केरल की एक प्रिय आध्यात्मिक परंपरा है, जिसने पीढ़ियों से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है।
उन्होंने कहा, ''पवित्र महीने में अध्यात्म रामायण के पाठ की परंपरा हमारी गहरी आध्यात्मिक धरोहर है। रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य, करुणा, विनम्रता और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जैसे आदर्शों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करने वाला धर्मपूर्ण जीवन का कालजयी मार्गदर्शक है।''
राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन लोगों को यह संदेश देता है कि नैतिक साहस और निस्वार्थ सेवा ही एक मजबूत और एकजुट समाज की वास्तविक नींव हैं।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि परिवारों द्वारा एक साथ बैठकर रामायण का पाठ करने की परंपरा लोगों की आस्था को और गहरा करेगी, जीवन-मूल्यों को मजबूत बनाएगी तथा समाज में शांति, सौहार्द और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देगी।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक बुजुर्ग महिला और दो बच्चे घर के आंगन में बैठकर रामायण का पाठ करते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने लिखा, ''आज कर्किडकम का पहला दिन है, जिसके साथ रामायण मासम की शुरुआत होती है।''
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी रामायण मासम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मलयालम माह कर्किडकम भगवान श्रीराम के जीवन में निहित धर्म, करुणा, त्याग और न्याय जैसे आदर्शों को आत्मसात करने का पवित्र समय है।
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी रामायण मासम की शुभकामनाएं दीं और इसे आध्यात्मिक नवजागरण का काल बताया, जब लोग अपने तन और मन को सद्गुणों के लिए समर्पित करते हैं।
गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में चेन्निथला ने कहा कि एक और रामायण मासम की शुरुआत हो गई है और यह आत्मशुद्धि का समय है।
उन्होंने कहा कि पहले के समय में कर्किडकम का महीना अभाव और कठिनाइयों का प्रतीक माना जाता था। उस दौर में लोग रामायण के पाठ के रूप में उपलब्ध 'ज्ञान रूपी दिव्य औषधि' के माध्यम से इन कठिनाइयों का सामना करते थे और यही परंपरा आगे चलकर रामायण मासम के रूप में विकसित हुई।
मलयालम पंचांग का अंतिम महीना कर्किडकम अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान केरल भर में श्रद्धालु अध्यात्म रामायण का पाठ करते हैं और उसका श्रवण भी करते हैं।
इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम तथा उनके भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को समर्पित मंदिरों में भी दर्शन के लिए जाते हैं।
इस वर्ष रामायण मासम का समापन 16 अगस्त को होगा।
भाषा गोला प्रशांत
प्रशांत
1707 1103 तिरुवनंतपुरम