अफ्रीका के कृषि क्षेत्र में चीन का बढ़ रहा निवेश, लेकिन कई अहम क्षेत्रों की अनदेखी
अविनाश
- 16 Jul 2026, 03:55 PM
- Updated: 03:55 PM
(एड्रिनो मजेंडा, प्रिटोरिया विश्वविद्यालय)
प्रिटोरिया, 16 जुलाई (द कन्वरसेशन) कृषि के मामले में चीन कहां और किस चीज में निवेश कर रहा है? चीन का निवेश मुख्य रूप से खेती के विकास, मत्स्य पालन, सिंचाई, मशीनरी, कृषि तकनीक और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है। हालांकि, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कोल्ड-चेन जैसी सुविधाओं में चीन का निवेश बहुत कम है।
दक्षिणी अफ्रीका के अंगोला, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और मोजाम्बिक को चीन से कृषि क्षेत्र के लिए सबसे अधिक ऋण प्राप्त होता है। इसके बाद पूर्वी अफ्रीका के इथियोपिया, केन्या और तंजानिया का स्थान है। वहीं, पश्चिमी अफ्रीका के नाइजीरिया और घाना भी चीनी कृषि निवेश के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं। इसके अलावा, चीन की वित्तीय संस्थाएं मिस्र के कृषि क्षेत्र में भी निवेश कर रही हैं।
मेरे अध्ययन में, चीनी संस्थानों द्वारा कृषि क्षेत्र को दिए गए ऋणों की तुलना अन्य क्षेत्रों को दिए गए ऋणों से की गई। साथ ही यह भी विश्लेषण किया गया कि ऋण किन संस्थाओं या देशों को मिले, धन का उपयोग किन क्षेत्रों में हुआ और किन प्रकार की कृषि परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
मैंने पाया कि वर्ष 2000 से 2024 के बीच चीनी संस्थानों ने अफ्रीका में कृषि क्षेत्र की 41 परियोजनाओं के लिए लगभग 2.26 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण दिए। इनमें सबसे अधिक निवेश खेती से जुड़ी परियोजनाओं में हुआ, जिनका हिस्सा कुल कृषि वित्त का लगभग 36 प्रतिशत रहा। इसके बाद 29 प्रतिशत निवेश मत्स्य पालन में किया गया। वहीं, भंडारण और कोल्ड-चेन के लिए केवल तीन प्रतिशत तथा खाद्य प्रसंस्करण के लिए दो प्रतिशत से भी कम धन उपलब्ध कराया गया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि बड़े ऋण अधिकतर सरकारी एजेंसियों और सरकार से जुड़े संस्थानों के माध्यम से दिए गए, जबकि राष्ट्रीय सरकारों को अपेक्षाकृत कम प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिला। इसके अलावा, चीन के कुल विकास वित्त में कृषि का हिस्सा अब भी छोटा है। परिवहन, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कृषि की तुलना में कहीं अधिक प्राथमिकता दी गई।
क्या कमियां हैं : मेरे अध्ययन में पाया गया कि चीनी निवेश से सिंचाई व्यवस्था, सड़कों और कृषि ढांचे में सुधार तो हुआ है, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और बाजार व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ। कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए इनकी जरूरत है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि चीन निवेश का निर्णय मुख्य रूप से परियोजना की व्यवहारिकता और उसे लागू करने की क्षमता के आधार पर लेता है, न कि अफ्रीका की कृषि व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की किसी दीर्घकालिक रणनीति के तहत।
यह चीनी कर्जदाताओं के उस व्यापक नजरिये के अनुरूप है, जिसके तहत वे किसी खास क्षेत्र को विकसित करने की व्यापक रणनीति अपनाने के बजाय उन परियोजनाओं को वित्त पोषित करते हैं जिनके पूरा हो सकने का उन्हें भरोसा होता है।
यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि अफ्रीका के कई देशों को अपनी कृषि व्यवस्था का आधुनिकीकरण करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है।
इन देशों के पास अक्सर सिंचाई परियोजनाओं, कृषि मशीनरी, भंडारण सुविधाओं, परिवहन अवसंरचना और खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों पर स्वयं खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय विकास भागीदारों से मिलने वाले ऋण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, इन ऋणों से दीर्घकालिक विकास होगा या नहीं, यह केवल उपलब्ध धनराशि पर नहीं बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि निवेश किन प्रकार की परियोजनाओं में किया जाता है।
अफ्रीका में कृषि को आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार बनाने के लिए केवल फसल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए बाजारों के विकास, कृषि अनुसंधान, कृषि विस्तार सेवाओं तथा ऐसी संस्थाओं में निवेश की आवश्यकता है जो किसानों को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ सकें। उदाहरण के तौर पर, छोटे किसानों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना बेहद आवश्यक है।
हालांकि, मेरे शोध में पाया गया कि चीन का निवेश इस क्षेत्र में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। चीन के वित्तपोषण से कृषि उत्पादन तो मजबूत हुआ है, लेकिन भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और बाजार व्यवस्था जैसे क्षेत्रों को अपेक्षाकृत बहुत कम समर्थन मिला, जबकि कृषि क्षेत्र में व्यापक और स्थायी बदलाव लाने के लिए इन्हें सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
(द कन्वरसेशन) शफीक अविनाश
अविनाश
1607 1555 प्रिटोरिया