जिंदगी कीमती है; सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रखें: दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिकारियों से कहा
मनीषा
- 16 Jul 2026, 03:10 PM
- Updated: 03:10 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर हर दिन नजर रखें और जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सीय मदद दें। वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में यहां जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि जिंदगी कीमती है और उसे बचाने के लिए अधिकारियों को सारे चिकित्सीय प्रयास करने चाहिए। अदालत ने कहा कि सरकारी चिकित्सकों को वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए।
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी कीमती है और वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच करने में कोई आपत्ति नहीं है।
अदालत ने कहा, ''हमारा मानना है कि किसी भी नागरिक की जिंदगी कीमती है और सरकारी अधिकारियों को उसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए।''
अदालत ने आदेश दिया, ''हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि वांगचुक की मेडिकल स्थिति पर रोजाना क्लीनिकल और अन्य तरीकों से निगरानी की जाए। साथ ही, चिकित्सकों की राय के आधार पर उनके स्वास्थ्य की स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए जो भी चिकित्सीय कदम जरूरी हों, वे उठाए जाएं।''
अदालत ने वांगचुक की सेहत को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर कार्यवाही बंद करते हुए यह आदेश दिया।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 25 दिनों से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रही है।
वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल (एसजी) मेहता से पूछा कि क्या भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता की सेहत की जांच करने का कोई तरीका है और क्या अधिकारियों के पास ऐसी रिपोर्ट हैं।
एसजी मेहता ने जवाब दिया कि रोजाना स्वास्थ्य जांच की जा रही है और वांगचुक व अन्य लोगों को उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है।
विधि अधिकारी ने कहा, ''जब-जब उन्होंने सरकारी डॉक्टर को जांच की अनुमति दी है, तब-तब हमारे पास (उनकी स्वास्थ्य संबंधी) रिपोर्ट उपलब्ध हुई है। कभी-कभी निजी चिकित्सक भी उनकी जांच करने आते हैं।''
हालांकि, अदालत ने कहा कि वह चाहती है कि सरकारी डॉक्टर वांगचुक की जांच करें और जरूरत पड़ने पर जरूरी कदम उठाएं।
अदालत ने कहा, ''हम निजी चिकित्सकों पर निर्भर नहीं हैं। हम चाहते हैं कि सरकारी डॉक्टर इस व्यक्ति की नियमित रूप से मेडिकल जांच करें और रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कदम उठाएं। अगर किसी भी तरह के चिकित्सीय हस्तक्षेप की जरूरत हो, तो कृपया दखल दें। जिंदगी कीमती है।''
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने कहा कि जब हालात ऐसे हों तो अधिकारियों को दखल देना चाहिए और वांगचुक की बिगड़ती सेहत का ध्यान रखना चाहिए।
अपनी जनहित याचिका में सैनी ने अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया कि वे वांगचुक की मदद करें और उनसे ''इस मुद्दे पर बातचीत'' करें। उन्होंने कार्यकर्ता को जबरदस्ती खाना खिलाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया।
जनहित याचिका में कहा गया कि भले ही सरकार इस मामले को लेकर चिंतित नहीं दिख रही हो, लेकिन अदालत राज्य को इस बात की अनुमति नहीं दे सकती वह किसी नागरिक को ''अपनी मर्जी से भूख से मरने के लिए छोड़ दे''।
इसमें कहा गया कि अगर वांगचुक की जान चली जाती है, तो यह देश के लिए बहुत शर्म की बात होगी और सरकार से कम से कम यह उम्मीद की जाती है कि वह उनकी जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत मेडिकल मदद दे।
भाषा सुरभि मनीषा
मनीषा
1607 1510 दिल्ली